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EVvsPetrol – कार खरीद में ओनरशिप कॉस्ट का बदलता गणित

EVvsPetrol – आज कार खरीदने का फैसला सिर्फ शोरूम कीमत या फीचर्स देखकर नहीं लिया जाता। असली तस्वीर तब साफ होती है जब कुल ओनरशिप कॉस्ट को जोड़ा जाए। इसमें गाड़ी की शुरुआती कीमत, ईंधन या बिजली पर होने वाला खर्च, नियमित सर्विस, इंश्योरेंस, टैक्स और आगे चलकर मिलने वाली रीसेल वैल्यू शामिल होती है। यही वजह है कि पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार के बीच तुलना अब ज्यादा गंभीरता से की जा रही है। सवाल सीधा है—लंबे समय में जेब पर कौन हल्की पड़ती है?

एंट्री लेवल सेगमेंट में खर्च का अंतर

अगर कॉम्पैक्ट सेडान और छोटी इलेक्ट्रिक कार की तुलना करें, तो तस्वीर दिलचस्प हो जाती है। उदाहरण के तौर पर एक पेट्रोल सेडान जहां बेहतर माइलेज देती है, वहीं एक छोटी इलेक्ट्रिक कार की प्रति किलोमीटर चलने की लागत काफी कम बैठती है। औसतन इलेक्ट्रिक कार को चलाने में 0.80 से 1 रुपये प्रति किलोमीटर तक का खर्च आता है, जबकि पेट्रोल कार में यही खर्च कई गुना अधिक हो सकता है।

मान लें कि पांच साल में कोई वाहन 75,000 किलोमीटर चलता है। इस अवधि में पेट्रोल पर करीब 3.5 से 4 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं, जबकि उतनी ही दूरी इलेक्ट्रिक कार से तय करने पर बिजली का बिल लगभग 60 से 70 हजार रुपये के बीच रह सकता है। शुरुआती कीमत में जो अंतर दिखाई देता है, वह कुछ वर्षों में काफी हद तक संतुलित हो जाता है।

मिड साइज एसयूवी में क्या है स्थिति

एसयूवी सेगमेंट में यह फर्क और स्पष्ट नजर आता है। पेट्रोल इंजन वाली एसयूवी का माइलेज शहर में अक्सर 10 से 12 किलोमीटर प्रति लीटर के आसपास रहता है। भारी बॉडी और बड़े इंजन की वजह से ईंधन खपत बढ़ जाती है। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक एसयूवी न केवल तुरंत टॉर्क देती हैं, बल्कि प्रति किलोमीटर खर्च में भी बचत कराती हैं।

शहर के ट्रैफिक में जहां बार-बार ब्रेक और एक्सीलेरेशन होता है, वहां इलेक्ट्रिक वाहन की दक्षता बेहतर साबित होती है। लंबे समय में ईंधन की बचत एक बड़ा आर्थिक अंतर पैदा कर सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना अधिक दूरी तय करते हैं।

प्रीमियम कारों में लागत का संतुलन

प्रीमियम सेगमेंट में पेट्रोल एसयूवी या क्रॉसओवर लग्जरी अनुभव जरूर देती हैं, लेकिन उनका फ्यूल बिल भी उसी स्तर का होता है। इसके उलट, इलेक्ट्रिक मॉडल खरीदने पर कई राज्यों में रोड टैक्स में छूट मिलती है। केंद्र और राज्य सरकारों की प्रोत्साहन योजनाओं से ऑन रोड कीमत में भी कुछ राहत मिलती है।

पांच साल के स्वामित्व की अवधि में देखा जाए तो एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन अपने पेट्रोल विकल्प के मुकाबले लाखों रुपये तक की बचत कर सकता है। यह अंतर शुरुआती ऊंची कीमत को कुछ हद तक उचित ठहराता है।

मेंटेनेंस में छिपी बड़ी बचत

पेट्रोल कार में नियमित अंतराल पर इंजन ऑयल, फिल्टर, कूलेंट और अन्य हिस्सों की सर्विस जरूरी होती है। पांच साल में करीब 8 से 10 बार सर्विस करानी पड़ सकती है। इसका कुल खर्च 70,000 से 90,000 रुपये तक पहुंच सकता है।

इलेक्ट्रिक कार में मूविंग पार्ट्स कम होते हैं, इसलिए सर्विसिंग अपेक्षाकृत आसान और सस्ती रहती है। आम तौर पर टायर रोटेशन, ब्रेक फ्लूइड और एसी फिल्टर जैसी चीजों तक ही खर्च सीमित रहता है। पांच साल में 15,000 से 25,000 रुपये के बीच मेंटेनेंस संभव है। यह अंतर लंबी अवधि में महत्वपूर्ण साबित होता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और रीसेल की बदलती तस्वीर

कुछ साल पहले तक चार्जिंग स्टेशन की कमी एक बड़ी चिंता थी, लेकिन अब बड़े शहरों और हाइवे पर चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार हुआ है। इससे रेंज को लेकर आशंका कम हुई है।

रीसेल वैल्यू की बात करें तो पेट्रोल कारों का बाजार अभी भी मजबूत है। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों में 8 साल तक की बैटरी वारंटी मिलने से सेकंड हैंड बाजार में भरोसा बढ़ा है। अनुमान है कि तीन से पांच साल बाद इलेक्ट्रिक कार अपनी मूल कीमत का 55 से 65 प्रतिशत तक वापस दिला सकती है। जैसे-जैसे तकनीक बेहतर हो रही है, यह प्रतिशत और मजबूत हो सकता है।

इंश्योरेंस और टैक्स का असर

इलेक्ट्रिक कार की एक्स शोरूम कीमत अधिक होने के कारण शुरुआती इंश्योरेंस प्रीमियम भी 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। लेकिन कई राज्यों में रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट मिलने से कुल लागत संतुलित हो जाती है। सरकारी योजनाओं का लाभ भी इस अंतर को कम करने में मदद करता है।

किसके लिए कौन बेहतर विकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर के भीतर होती है और सालाना रनिंग ज्यादा है, तो इलेक्ट्रिक कार आर्थिक रूप से फायदे का सौदा हो सकती है। वहीं, लंबी दूरी की नियमित यात्रा या सीमित बजट की स्थिति में पेट्रोल कार अब भी व्यावहारिक विकल्प मानी जाती है।

अंततः निर्णय आपकी जरूरत, बजट और उपयोग के पैटर्न पर निर्भर करता है। सही तुलना और दीर्घकालिक गणना के बाद ही कार खरीदना समझदारी भरा कदम होगा।

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