CyberCrime – लखनऊ में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर गिरोह की जांच तेज, जेल भेजे गए 119 आरोपी
CyberCrime – लखनऊ में कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े फर्जी कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार 119 आरोपियों को जिला जेल भेज दिया गया है। पुलिस की जांच के अनुसार यह गिरोह विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देता था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की पहली रात जेल में बीती, जहां सभी को निर्धारित नियमों के तहत रखा गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।

समिट बिल्डिंग से संचालित हो रहा था कथित नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार लखनऊ की समिट बिल्डिंग में संचालित एक कॉल सेंटर से कथित तौर पर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जनवरी 2025 से संचालित इस नेटवर्क के माध्यम से अमेरिका के नागरिकों से बड़ी रकम की साइबर ठगी की गई। पुलिस का दावा है कि गिरोह ने तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित किया और करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की। इस मामले में विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
VOIP तकनीक से करते थे कथित ठगी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी Voice over Internet Protocol (VOIP) तकनीक का उपयोग कर कॉल करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कॉल करने वाले खुद को अमेरिकी जांच एजेंसी FBI का अधिकारी बताकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। इसके बाद कथित रूप से उन्हें विभिन्न बहानों से भुगतान करने के लिए राजी किया जाता था। पुलिस इस पूरे मॉड्यूल में शामिल अन्य संदिग्धों और विदेश में मौजूद संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पूछताछ में सामने आई अहम जानकारियां
डीसीपी क्राइम अनिल यादव के अनुसार गिरफ्तार लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों को अंग्रेजी भाषा में बातचीत का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था ताकि वे विदेशी नागरिकों से सहज रूप से संवाद कर सकें। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कर्मचारियों को मासिक वेतन भी दिया जाता था। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी करा रही है।
जेल भेजे जाने के बाद प्रक्रिया पूरी
जेल प्रशासन के अनुसार सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें नियमानुसार बैरकों में भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी बंदियों के साथ जेल मैनुअल के अनुसार प्रक्रिया अपनाई गई। मामले से जुड़े किसी भी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां उनके संभावित ठिकानों और नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार मामले के सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की गहन जांच की जा रही है, ताकि पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली का पता लगाया जा सके और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।