BrajeshPathak – लखनऊ में बटुकों का सम्मान, सियासत में नई चर्चा
BrajeshPathak – राजधानी लखनऊ में गुरुवार को उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी। इस अवसर पर उन्होंने 100 बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। पारंपरिक विधि से तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर उन्हें आशीर्वाद दिया गया। कार्यक्रम का स्वर धार्मिक और सांस्कृतिक रहा, लेकिन इसके राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे हैं।

सम्मान समारोह का आयोजन
डिप्टी सीएम आवास पर हुए इस कार्यक्रम में वैदिक परंपरा के अनुरूप बटुकों का स्वागत किया गया। उन्हें अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। बृजेश पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन परंपराओं का सम्मान करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था और परंपरा के प्रतीकों के साथ किसी प्रकार का अनादर उचित नहीं है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक टिप्पणी करते हुए कहा कि चोटी खींचने वालों को पाप लगेगा। इस बयान को हाल के विवादों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे धार्मिक संदर्भ में कही गई बात बताया।
शंकराचार्य विवाद की पृष्ठभूमि
प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शुरू हुआ शंकराचार्य से जुड़ा विवाद अभी शांत नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस विषय पर अपनी बात रख चुके हैं। हाल ही में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए संकेतों में टिप्पणी की थी, जिसे लेकर चर्चा तेज हुई। बजट सत्र के दौरान भी उन्होंने कहा था कि कोई भी स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाए। राजनीतिक मंचों पर यह बहस लगातार जारी है।
डैमेज कंट्रोल की अटकलें
ऐसे समय में जब शंकराचार्य विवाद चर्चा में है, बृजेश पाठक द्वारा बटुकों का सम्मान किए जाने को कई राजनीतिक विश्लेषक व्यापक संदर्भ में देख रहे हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि यह आयोजन धार्मिक समुदाय के प्रति समर्थन और सम्मान जताने का संदेश हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इसे सामान्य सांस्कृतिक कार्यक्रम बताया गया है।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों का प्रभाव हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रमों को केवल धार्मिक आयोजन मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाता।
सियासी माहौल में बढ़ी सक्रियता
उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों कई मुद्दों को लेकर सक्रिय है। विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। ऐसे में हर सार्वजनिक कार्यक्रम और बयान को व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
फिलहाल बृजेश पाठक के इस कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि उन्होंने स्वयं इसे परंपरा और संस्कृति के सम्मान का हिस्सा बताया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस किस दिशा में जाती है, इस पर नजर रहेगी।



