Lucknow Weather Today Update: अवध में खिली गुनगुनी धूप, पर इन इलाकों में बर्फीली हवाओं और पाले ने छुड़ाई कंपकंपी
Lucknow Weather Today Update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के अवध क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक सुखद अहसास लेकर आई। कई दिनों से जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच जैसे ही सूर्यदेव की सुनहरी किरणें खिलीं, लोगों के चेहरे खुशी से दमक उठे। इस (Natural Sunlight Benefits in Winter) का आनंद लेने के लिए लोग अपने घरों की छतों और पार्कों में नजर आए। धूप निकलने से न केवल ठिठुरन कम हुई, बल्कि सड़कों पर जनजीवन भी सामान्य होता दिखा। पिछले कई दिनों से शीतलहर के कारण जो सन्नाटा पसरा था, वह धूप की तपिश के साथ दूर हो गया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतलहर का जबरदस्त प्रहार
एक तरफ जहां लखनऊ में राहत है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में कुदरत का कहर जारी है। सोमवार को मौसम के बदले मिजाज ने रात के वक्त कंपकंपी और बढ़ा दी है। तापमान में आई भारी गिरावट के कारण (Lucknow Weather Today Update) अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। मुजफ्फरनगर और बरेली जैसे जिलों में पारा गिरने से पाला पड़ने की संभावना प्रबल हो गई है। मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है, जिससे फसलों और जनजीवन दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
बरेली और मुजफ्फरनगर में जमने लगा पारा
आंकड़ों की बात करें तो बरेली में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि मुजफ्फरनगर में यह 3.9 डिग्री तक लुढ़क गया है। इन जिलों में (Minimum Temperature Records in UP) ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को चुनौती दी है। शीतलहर ने यहां दस्तक दे दी है और तराई क्षेत्रों में घने कोहरे के साथ-साथ बर्फीली हवाओं का चलना जारी है। मंगलवार को भी इन जिलों में कोहरे की मोटी चादर लिपटी रही, जिससे विजिबिलिटी काफी कम दर्ज की गई और यातायात पर इसका गहरा असर पड़ा।
हवाओं की बदली दिशा ने बढ़ाई ठिठुरन
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, हाल ही में गुजरे पश्चिमी विक्षोभ ने हवाओं के रुख को पूरी तरह बदल दिया है। अब हवा की दिशा पुनः परिवर्तित होकर उत्तर-पश्चिमी हो गई है, जो सीधे पहाड़ों की बर्फबारी की ठंडक लेकर मैदानी इलाकों में पहुंच रही है। इस (Impact of North Western Winds) की वजह से बीते 24 घंटों के दौरान पूर्वांचल के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे प्रदेश में दिन और रात के तापमान में 1 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। यही कारण है कि धूप निकलने के बावजूद हवा में मौजूद कनकनी खत्म नहीं हो रही है।
आगामी 48 घंटों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह और मोहम्मद दानिश ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों के दौरान मौसम में किसी बड़े सकारात्मक बदलाव के आसार नहीं हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडलों में (Frost and Fog Warnings) जारी की गई है। रूहेलखंड मंडल के जिलों में कहीं-कहीं रात के समय शीतलहर चलने के साथ पाला पड़ने की भी पूरी संभावना है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों को पाले से बचाने के लिए उचित उपाय करें।
तराई इलाकों में कोहरे का साया और धूप की उम्मीद
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश के उत्तरी तराई इलाकों में भोर के समय बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। अन्य स्थानों पर भी हल्के से मध्यम कोहरे की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि, (Winter Sun and Fog Dissipation) की प्रक्रिया दिन चढ़ने के साथ तेज होगी। जैसे-जैसे सूरज की गर्मी बढ़ेगी, कोहरा छंटना शुरू हो जाएगा और दोपहर तक धूप निकलने से लोगों को ठंड से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। तापमान में क्रमिक वृद्धि होने से शीतलहर का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर ठंड का असर
ठंड और शीतलहर की वजह से अस्पतालों में सर्दी-जुकाम और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि (Health Precautions in Winter Season) का सख्ती से पालन करें, विशेषकर बुजुर्ग और बच्चे। सुबह और शाम के वक्त जब कोहरा और ठंड ज्यादा हो, तब बाहर निकलने से बचें। गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें और शरीर को पूरी तरह ढंक कर रखें। पश्चिमी यूपी में जहां शीतलहर चल रही है, वहां हीटर और अलाव का सहारा लेते समय वेंटिलेशन का भी ख्याल रखें ताकि दम घुटने जैसी घटनाएं न हों।
किसानों के लिए मौसम की जानकारी और सुझाव
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम तापमान 4 डिग्री से नीचे चले जाने पर फसलों में पाला लगने का डर रहता है। (Agricultural Impact of Frost) को कम करने के लिए किसान भाई शाम के समय खेतों की मेड़ों पर धुआं कर सकते हैं या हल्की सिंचाई कर सकते हैं। इससे मिट्टी का तापमान बना रहता है और पौधों को नुकसान कम होता है। आलू, मटर और सरसों जैसी फसलों के लिए यह समय काफी संवेदनशील है, इसलिए मौसम विभाग के अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है।



