Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर को मिली 400 साल पुरानी रामायण, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी श्रमिकों का सम्मान
Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ वहां दुर्लभ और प्राचीन धरोहरों का संग्रह भी बढ़ता जा रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि ट्रस्ट को 400 वर्ष पुरानी एक अत्यंत दुर्लभ वाल्मीकि रामायण प्राप्त हुई है। यह ऐतिहासिक पांडुलिपि दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भेंट की गई है। प्राचीन धरोहरों की इस शृंखला में कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य द्वारा सौंपा गया ‘राम यंत्र स्तोत्र’ भी शामिल है, जिसे अब सुरक्षित रूप से मंदिर परिसर में पहुंचा दिया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या दौरा और श्रमिकों का सम्मान
नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण की प्रगति और आगामी आयोजनों का विवरण देते हुए बताया कि आगामी 19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अयोध्या आगमन की अनौपचारिक सहमति मिल चुकी है। यह दिन विशेष इसलिए भी है क्योंकि इस दिन हिंदू नव वर्ष का उत्सव मनाया जाएगा। अपने इस प्रवास के दौरान राष्ट्रपति राम मंदिर निर्माण में दिन-रात जुटे लगभग 400 श्रमिकों को सम्मानित करेंगी। यह उन कारीगरों और मजदूरों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक बड़ा अवसर होगा, जिन्होंने इस आधुनिक शिल्प को साकार करने में अपना पसीना बहाया है।
गर्भगृह में स्थापित होंगे पवित्र ग्रंथ और दुर्लभ स्तोत्र
मंदिर के गर्भगृह की पवित्रता और महत्ता को बढ़ाते हुए, ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि प्राप्त हुई 400 वर्ष पुरानी रामायण और शंकराचार्य द्वारा दिए गए राम यंत्र स्तोत्र को वहीं विधिवत स्थापित किया जाएगा। नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, देशभर से आने वाली ऐसी दुर्लभ रामायणों और ग्रंथों के चयन के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा रहा है। ट्रस्ट जल्द ही एक सार्वजनिक विज्ञापन जारी करेगा, ताकि देश के किसी भी कोने में संरक्षित प्राचीन रामायणों को मंदिर के संग्रह का हिस्सा बनाया जा सके।
शहीदों का स्मारक और अस्थायी मंदिर का स्वरूप
राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को संजोने के लिए भी ट्रस्ट ने विशेष योजना बनाई है। नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि रामलला के उस अस्थायी मंदिर को, जहां वे वर्षों तक विराजमान रहे, फरवरी के अंत तक एक ‘मेमोरियल’ (स्मारक) के रूप में विकसित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपना बलिदान देने वाले शहीदों की स्मृति में बन रहा स्मारक भी मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा। यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को इस संघर्ष की गाथा से परिचित कराएगा।
निर्माण कार्य की समयसीमा और अंतिम समीक्षा
शुक्रवार से शुरू हो रही दो दिवसीय समीक्षा बैठक में नृपेंद्र मिश्र निर्माण कार्यों की बारीकियों पर नजर रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। अप्रैल के अंत तक एल एंड टी (L&T) और टीसीएस (TCS) जैसी बड़ी कंपनियां अपना निर्धारित कार्य पूरा कर लेंगी, जिसके बाद उनकी वहां से रवानगी तय है। नृपेंद्र मिश्र का यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि वे मंदिर परिसर की फिनिशिंग, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू का बारीकी से निरीक्षण करेंगे।



