उत्तर प्रदेश

AITracking – आगरा पुलिस अपराधियों के लिए तैयार कर रही है यूनिक आईडी प्रणाली

AITracking – आगरा कमिश्नरेट पुलिस अब अपराध नियंत्रण के लिए तकनीक का सहारा तेज़ी से ले रही है। शहर में लगे सीसीटीवी नेटवर्क के साथ अब 3-डी कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम को भी जोड़ा जा रहा है। पुलिस विभाग जल्द ही एक ऐसी यूनिक आईडी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसके जरिए पंजीकृत अपराधियों का पूरा ब्यौरा डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से जांच प्रक्रिया तेज होगी और अपराधियों की पहचान में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा।

अपराधियों का विस्तृत डाटा तैयार

कमिश्नरेट के नगर जोन में करीब 26 हजार से अधिक अपराधी दर्ज हैं, जबकि पूर्वी और पश्चिमी जोन मिलाकर यह संख्या 24 हजार के आसपास है। इन सभी का रिकॉर्ड एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संकलित किया जा रहा है। डकैती, लूट, चोरी, हत्या, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, साइबर अपराध और गैंगस्टर जैसे मामलों में शामिल आरोपियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि एकीकृत डाटा बेस तैयार होने से जांच एजेंसियों को तुरंत संदिग्धों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी

इस योजना के तहत बीट सिपाहियों और दरोगाओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे पंजीकृत आरोपियों के घर जाकर उनकी ताज़ा तस्वीरें लें और फिंगरप्रिंट दर्ज करें। हर व्यक्ति को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा, जिससे उसका पूरा आपराधिक इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। इस प्रक्रिया में परिवार और निवास संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी, ताकि सत्यापन में आसानी रहे। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में यदि कोई आरोपी दोबारा अपराध करता है तो बायोमेट्रिक डाटा के जरिए उसकी पहचान तुरंत की जा सकेगी।

पहले से मौजूद एप्स का विस्तार

आगरा पुलिस के पास पहले से त्रिनेत्र और पहचान जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। त्रिनेत्र में जेल भेजे गए अपराधियों का विस्तृत डोजियर तैयार किया जाता है, जिसमें अंगूठे के निशान और पारिवारिक विवरण शामिल होते हैं। पहचान एप में आरोपी का बुनियादी परिचय दर्ज रहता है। अब नई प्रणाली में एफआईआर और आरोप पत्र से जुड़ी सूचनाएं भी जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा अपराधियों की आवाज का नमूना और ताज़ा फोटो भी सुरक्षित रखा जाएगा।

एआई की मदद से त्वरित पहचान

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था में फोटो अपलोड करते ही एआई तकनीक संभावित पहचान सुझाएगी। यदि चेहरा स्पष्ट न हो तो आवाज के नमूने के आधार पर भी मिलान किया जा सकेगा। खास तौर पर लूट और डकैती जैसे मामलों में यह प्रणाली उपयोगी साबित हो सकती है। किसी अन्य जिले में गिरफ्तारी होने पर भी संबंधित थाने द्वारा डाटा अपडेट किया जाएगा, जिससे आरोपी का पूरा रिकॉर्ड सामने आ जाएगा। जेल से रिहाई की स्थिति में भी सिस्टम के माध्यम से सूचना प्राप्त होगी और सत्यापन प्रक्रिया की जाएगी।

जांच प्रक्रिया में तेजी की उम्मीद

अक्सर देखा गया है कि वारदात के बाद सीसीटीवी फुटेज मिलने के बावजूद पहचान में समय लग जाता है। इसी कारण कई मामलों के खुलासे में देरी होती है। पुलिस का दावा है कि नई डिजिटल आईडी प्रणाली लागू होने के बाद संदिग्ध की पहचान और उसके आपराधिक इतिहास की जांच में लगने वाला समय काफी घट जाएगा। विभाग इसे आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।

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