VirtualHearing – देशभर में ऑनलाइन सुनवाई बढ़ाने पर न्यायपालिका ने दिया जोर
VirtualHearing – भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने देश की अदालतों में ऑनलाइन सुनवाई को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने सभी उच्च न्यायालयों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई को अपनाने का अनुरोध किया है। कई उच्च न्यायालयों ने इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया है। इस मुद्दे पर दिल्ली की अदालतों में भी ऑनलाइन सुनवाई शुरू करने की मांग को लेकर एक याचिका दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से इस व्यवस्था को लागू करने का आग्रह किया है। उनका कहना था कि यह व्यवस्था अदालतों और वकीलों दोनों के लिए स्वैच्छिक रूप से अपनाई जानी चाहिए।
जिला अदालतों तक बढ़ सकती है व्यवस्था
सुनवाई के दौरान एक वकील ने देशभर की जिला अदालतों में अगले तीन महीने तक ऑनलाइन सुनवाई लागू करने की मांग रखी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जिला अदालतें संबंधित उच्च न्यायालयों के प्रशासनिक नियंत्रण में आती हैं। उन्होंने बताया कि जिला न्यायालयों में भी डिजिटल सुनवाई व्यवस्था लागू करने को लेकर उच्च न्यायालयों से अनुरोध किया गया है।
न्यायपालिका के इस कदम को अदालतों की कार्यप्रणाली को अधिक सुविधाजनक और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कोविड काल के दौरान शुरू हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था ने कई मामलों में सुनवाई प्रक्रिया को आसान बनाया था, जिसके बाद इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी सामने आई थी।
खर्चों में कटौती पर भी ध्यान
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ते खर्चों का हवाला देते हुए उच्च न्यायालयों से सप्ताह में दो दिन ऑनलाइन सुनवाई करने का सुझाव दिया था। उन्होंने सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामलों की सुनवाई पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 मई से सप्ताह के कुछ दिनों में वर्चुअल मोड में सुनवाई का फैसला लिया है। अदालत का मानना है कि इससे यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।
न्यायाधीशों ने कार पूलिंग पर भी दिया जोर
ऑनलाइन सुनवाई के साथ-साथ न्यायपालिका ने ईंधन बचत को लेकर भी कदम उठाने की बात कही है। जानकारी के अनुसार, न्यायाधीशों ने कार पूलिंग को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया है ताकि अनावश्यक ईंधन खपत कम की जा सके।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र सरकार भी विभिन्न स्तरों पर खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी सार्वजनिक संस्थानों से फिजूल खर्च कम करने की अपील की गई थी।
डिजिटल न्याय व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था से दूरदराज के इलाकों के लोगों को भी राहत मिल सकती है। इससे वकीलों और पक्षकारों को यात्रा में लगने वाला समय और खर्च दोनों कम होंगे। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि तकनीकी ढांचे और इंटरनेट सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी होगा ताकि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से चल सके।
फिलहाल न्यायपालिका डिजिटल माध्यमों के जरिए अदालतों की कार्यप्रणाली को अधिक सुलभ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करती दिखाई दे रही है।