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SupremeCourt – बेअंत सिंह हत्या मामले में सुनवाई 11 मार्च तक टली

SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक स्थगित कर दी है। हवारा ने तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरण की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर मामले को अगली तारीख के लिए सूचीबद्ध किया।

स्थानांतरण की मांग के पीछे दलील

हवारा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के निवासी हैं और उनके खिलाफ दिल्ली में फिलहाल कोई अन्य मामला लंबित नहीं है। ऐसे में उन्हें अपने गृह राज्य की जेल में रखने पर विचार किया जाना चाहिए। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले लगभग उन्नीस वर्षों से जेल में उनका आचरण संतोषजनक रहा है।

हालांकि दस्तावेजों में वर्ष 2004 में उनके जेल से फरार होने की घटना का जिक्र भी सामने आया है, जिसे अदालत के संज्ञान में लाया गया। हवारा की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि इसी मामले से जुड़े एक अन्य दोषी को तिहाड़ से चंडीगढ़ जेल स्थानांतरित किया जा चुका है, इसलिए उनके मामले में भी समान आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

लंबित अपीलों का संदर्भ

इस प्रकरण से जुड़ी अपीलें अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हवारा और अभियोजन पक्ष, दोनों ने शीर्ष अदालत में अपील दायर कर रखी है। ऐसे में मामले का अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी है। अदालत ने फिलहाल केवल स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई टाली है और अगली तारीख 11 मार्च निर्धारित की है।

1995 के विस्फोट की पृष्ठभूमि

जगतार सिंह हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के बाहर हुए बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इस हमले में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित 16 अन्य लोगों की जान गई थी। यह घटना उस समय देशभर में चर्चा का विषय बनी थी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस छिड़ी थी।

मार्च 2007 में ट्रायल कोर्ट ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी। बाद में अक्टूबर 2010 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि उन्हें जीवन भर कारावास में रहना होगा।

अब शीर्ष अदालत में लंबित अपीलों और स्थानांतरण याचिका पर आगे की सुनवाई 11 मार्च को होगी। अदालत के आगामी निर्णय पर सभी पक्षों की नजर रहेगी, क्योंकि यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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