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Maharashtra Mahayuti Alliance Conflict: बीजेपी ने अपनी ही सहयोगी एनसीपी को चुनाव आयोग में घसीटा, क्या टूट जाएगा गठबंधन का धागा…

Maharashtra Mahayuti Alliance Conflict: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में निकाय चुनाव की आहट के साथ ही तापमान अपने चरम पर पहुंच गया है। ताज्जुब की बात यह है कि असली जंग विपक्षी दलों से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के भीतर ही छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बीच खींचतान अब खुलेआम सड़क पर आ गई है। चुनाव प्रचार के दौरान (Political Tension in Maharashtra) इस कदर बढ़ गई है कि दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर सीधा हमला बोलने से नहीं कूक रहे हैं। इस तकरार ने गठबंधन की मजबूती पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

Maharashtra Mahayuti Alliance Conflict
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बीजेपी ने सहयोगी एनसीपी के खिलाफ खोला मोर्चा

रिश्तों में तल्खी इस कदर बढ़ गई है कि अब भाजपा अपने ही सहयोगी दल एनसीपी के खिलाफ चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हो गई है। महाराष्ट्र भाजपा के महासचिव राजेश पांडे ने आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है कि पुणे नगर निकाय चुनावों से पहले नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। बीजेपी का आरोप है कि (Election Commission Complaint Procedures) के तहत यह कदम उठाना जरूरी हो गया था क्योंकि शहर में अवैध प्रचार सामग्री की बाढ़ आ गई है। यह पहली बार है जब गठबंधन के दो प्रमुख घटक दल इस तरह कानूनी लड़ाई में आमने-सामने आए हैं।

अवैध होर्डिंग्स और फ्लेक्स को लेकर छिड़ा विवाद

पुणे शहर की दीवारों और चौराहों पर लगे अवैध होर्डिंग्स इस पूरे विवाद की जड़ बने हुए हैं। बीजेपी के मुताबिक, एनसीपी और अन्य दलों ने शहर की सुंदरता को बिगाड़ते हुए भारी मात्रा में अनाधिकृत फ्लेक्स लगाए हैं। पार्टी ने इसे (Violation of Model Code of Conduct) का स्पष्ट मामला बताया है। बीजेपी महासचिव ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी तरह के अवैध बैनर न लगाएं, लेकिन दूसरी ओर एनसीपी लगातार नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। यह विवाद अब शहर की स्वच्छता बनाम राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है।

देवेंद्र फडणवीस का बैनर-मुक्त पुणे का संकल्प

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को विशेष निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अवैध होर्डिंग्स न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि इनसे शहर की सूरत भी खराब होती है। रविवार को हुई एक बैठक में (Sustainable Urban Development Planning) पर जोर देते हुए सीएम ने पुणे को ‘बैनर-पोस्ट मुक्त’ बनाने का संकल्प लिया। बीजेपी इसी संकल्प को ढाल बनाकर अब एनसीपी को घेर रही है, जिससे गठबंधन के भीतर का अविश्वास और गहरा होता जा रहा है।

अजित पवार के बिगड़ते बोल पर सीएम का पलटवार

विवाद केवल बैनर-पोस्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि जुबानी हमले भी तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने एनसीपी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका संयम अब डगमगा रहा है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में प्रचार के दौरान अजित पवार द्वारा बीजेपी की आलोचना किए जाने पर (Leadership Crisis in Coalition) के संकेत साफ मिलने लगे हैं। फडणवीस ने याद दिलाया कि भले ही दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन गठबंधन की गरिमा और सौहार्दपूर्ण मुकाबले की शर्त को बनाए रखना जरूरी था।

‘दोस्ताना मुकाबले’ की आड़ में कड़वाहट का खेल

दरअसल, बीजेपी और एनसीपी ने काफी पहले ही यह तय कर लिया था कि वे पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के नगर निगम चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे। दोनों ही पार्टियां इस क्षेत्र में खुद को बेहद मजबूत मानती हैं, इसलिए (Local Body Elections Strategy) के तहत उन्होंने ‘दोस्ताना मुकाबले’ का रास्ता चुना था। लेकिन जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, यह मुकाबला ‘दोस्ताना’ रहने के बजाय व्यक्तिगत हमलों और कानूनी शिकायतों के दौर में तब्दील हो गया है।

निकाय चुनाव में साख बचाने की बड़ी चुनौती

पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ का क्षेत्र महाराष्ट्र की राजनीति का पावर सेंटर माना जाता है। यहाँ जीत हासिल करना न केवल वर्चस्व की बात है, बल्कि आगामी विधानसभा समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसी (Political Influence in Pune) को बरकरार रखने की होड़ में महायुति के सहयोगी ही एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन नजर आ रहे हैं। बीजेपी चाहती है कि वह शासन और नियमों के पालन का चेहरा बने, जबकि एनसीपी आक्रामक तरीके से अपनी जमीन तलाश रही है। इस खींचतान का सीधा फायदा महाविकास अघाड़ी (MVA) को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

क्या गठबंधन के भविष्य पर पड़ेगा इसका असर?

इस ताजा विवाद ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या महायुति का भविष्य संकट में है? चुनाव आयोग में अपनी ही सहयोगी के खिलाफ शिकायत दर्ज करना (Future of Mahayuti Alliance) के लिहाज से एक आत्मघाती कदम भी साबित हो सकता है। यदि चुनाव आयोग एनसीपी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करता है, तो अजित पवार का खेमा और भी ज्यादा आक्रामक हो सकता है। फिलहाल, महाराष्ट्र की जनता इस राजनीतिक सर्कस को देख रही है और आने वाले निकाय चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि कौन किस पर भारी पड़ा।

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