SeatSharing – तमिलनाडु चुनाव से पहले डीएमके-वीसीके समझौता अंतिम चरण में…
SeatSharing – तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ डीएमके अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसी क्रम में पार्टी आज अपने प्रमुख सहयोगी वीसीके के साथ समझौते को अंतिम रूप दे सकती है। राज्य में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले गठबंधन की रणनीति को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। परिवहन और बिजली मंत्री एस एस शिवशंकर ने संकेत दिए हैं कि बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

गठबंधन की रणनीति पर तेजी से काम
डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन ने अपने सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। सोमवार को माकपा के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति बनने के बाद अब वीसीके के साथ बातचीत अंतिम दौर में है। पार्टी का लक्ष्य है कि चुनाव से पहले सभी सहयोगी दलों के बीच स्पष्ट समझौता हो जाए, ताकि प्रचार अभियान बिना किसी असमंजस के आगे बढ़ सके। यह रणनीति गठबंधन को संगठित और प्रभावी बनाए रखने के लिए अहम मानी जा रही है।
प्रचार अभियान पहले ही हो चुका शुरू
डीएमके ने सीट बंटवारे के साथ-साथ चुनावी प्रचार भी तेज कर दिया है। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं। पार्टी का फोकस जमीनी स्तर पर मतदाताओं तक पहुंच बनाने और अपने कामकाज को सामने रखने पर है। शुरुआती चरण में ही प्रचार शुरू करने का उद्देश्य यह है कि चुनावी माहौल में बढ़त बनाई जा सके और मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत की जाए।
सहयोगी दलों को सीटों का आवंटन
गठबंधन के भीतर सीटों का बंटवारा लगभग तय हो चुका है। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 28 सीटें दी गई हैं, जो गठबंधन में उसकी प्रमुख भूमिका को दर्शाती हैं। इसके अलावा एमडीएमके को चार सीटें मिली हैं, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, मानिथनेया मक्कल काची और कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची को दो-दो सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है। वामपंथी दलों के साथ भी कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी है, जिसमें भाकपा और माकपा को पांच-पांच सीटें आवंटित की गई हैं।
चुनाव से पहले समीकरण मजबूत करने की कोशिश
राज्य में चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में लगे हैं। डीएमके का प्रयास है कि गठबंधन में किसी तरह का मतभेद न रहे और सभी सहयोगी एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरें। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्पष्ट सीट बंटवारा और समय पर प्रचार अभियान गठबंधन को चुनावी मुकाबले में बढ़त दिला सकता है। आने वाले दिनों में वीसीके के साथ समझौते की घोषणा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाएगी।



