RussiaOil – अमेरिकी बयान पर कांग्रेस ने उठाया सवाल, केंद्र की चुप्पी पर बढ़े नए विवाद
RussiaOil – अमेरिका की ओर से रूसी तेल खरीद को लेकर दिए गए एक बयान के बाद भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए सवाल उठाया कि इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी जा रही है। पार्टी ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी थी। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के शब्द भारत की संप्रभुता और सम्मान के लिए उचित नहीं हैं और सरकार को इस पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए।

कांग्रेस ने बयान के शब्दों को लेकर जताई आपत्ति
कांग्रेस ने विशेष रूप से उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें भारत को “अनुमति दिए जाने” और “अच्छा पक्षकार” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। पार्टी ने कहा कि किसी भी स्वतंत्र देश के लिए इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह बयान भारत की विदेश नीति और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े करता है।
पार्टी ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अमेरिका ने भारत को रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी है और भारत को एक अच्छा पक्षकार बताया है। कांग्रेस के मुताबिक यह टिप्पणी ऐसी है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
केंद्र सरकार की चुप्पी पर विपक्ष के सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। पार्टी ने कहा कि जब किसी दूसरे देश की ओर से इस तरह की टिप्पणी की जाती है, तो भारत सरकार को स्पष्ट रूप से अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल कूटनीतिक बयान नहीं बल्कि भारत की संप्रभुता से जुड़ा विषय है।
पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार को देश के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या भारत के ऊर्जा संबंधी फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जा रहे हैं या फिर किसी बाहरी दबाव या अनुमति से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस के अनुसार देश के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख रखती है।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा था
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने का फैसला किया।
लीविट ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि भारत जैसे सहयोगी देशों ने पहले प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था और उन्होंने जिम्मेदार रवैया दिखाया है। उनके अनुसार यह व्यवस्था केवल सीमित अवधि के लिए है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।
ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक स्थिति का हवाला
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के कारण तेल आपूर्ति में अस्थायी बाधा उत्पन्न हुई है। इस परिस्थिति को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने अपने सहयोगी देशों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति, वित्त मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया गया। उनका कहना था कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई अस्थायी कमी को संतुलित करना है।
राजनीतिक बहस के बीच सरकार से स्पष्टीकरण की मांग
इस बयान के सामने आने के बाद भारतीय राजनीति में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर संसद और जनता के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है।
राजनीतिक हलकों में अब इस बात पर नजर है कि केंद्र सरकार इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं। फिलहाल सरकार की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत टिप्पणी सामने नहीं आई है, जबकि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है।



