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RajyaSabhaElection – उम्मीदवार चयन पर असहमति से बढ़ी राजनीतिक हलचल

RajyaSabhaElection – आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर मध्य प्रदेश और झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर उभरे मतभेदों ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इन परिस्थितियों के बीच भारतीय जनता पार्टी संभावित राजनीतिक अवसर तलाशती नजर आ रही है। दोनों राज्यों में सीटों के गणित और दलों के अंदर चल रही चर्चाओं ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों में संख्या बल के साथ-साथ दलों के भीतर एकजुटता भी निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में उम्मीदवारों को लेकर सामने आए असंतोष पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।

मध्य प्रदेश में उम्मीदवार चयन पर चर्चा

मध्य प्रदेश में कांग्रेस द्वारा राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ वर्गों में असंतोष की चर्चा शुरू हो गई है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं में से किसी को राज्यसभा भेजा जाएगा। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब यह देखा जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक स्तर पर किस प्रकार समन्वय स्थापित करता है।

कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता

पिछले कुछ चुनावों में विभिन्न राज्यों में सामने आए क्रॉस वोटिंग के अनुभव को देखते हुए कांग्रेस इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। इसी क्रम में पार्टी नेतृत्व ने विधायकों के साथ बैठकों का दौर शुरू किया है।

सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि मतदान के दौरान पार्टी की रणनीति पूरी तरह प्रभावी रहे। कांग्रेस नेतृत्व का फोकस संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और किसी भी संभावित असंतोष को समय रहते दूर करने पर है।

झारखंड में सहयोगी दलों के बीच मतभेद

झारखंड में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच कुछ मुद्दों पर अलग-अलग राय सामने आई है।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, झामुमो के कुछ नेताओं ने उम्मीदवार चयन से पहले व्यापक परामर्श की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सहयोगी दलों और विधायकों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।

भाजपा की रणनीति पर नजर

मध्य प्रदेश और झारखंड में उभर रहे राजनीतिक समीकरणों के बीच भाजपा भी अपनी रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी पहले ही कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है और आगे की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों के भीतर मतभेद बने रहते हैं तो इसका असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम परिणाम काफी हद तक मतदान के दिन दलों की एकजुटता पर निर्भर करेगा।

मध्य प्रदेश का संख्या बल क्या कहता है

मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर भाजपा को स्पष्ट बढ़त हासिल है। राज्यसभा की सीटों के लिए आवश्यक मतों के हिसाब से पार्टी दो सीटों पर मजबूत स्थिति में मानी जा रही है। वहीं कांग्रेस के पास भी एक सीट जीतने लायक संख्या मौजूद है।

हालांकि अतिरिक्त सीटों को लेकर संभावनाएं तभी बन सकती हैं जब मतदान के दौरान अपेक्षित संख्या से अधिक समर्थन प्राप्त हो। इसी कारण सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां

राज्यसभा चुनाव के करीब आते ही दोनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दलों के भीतर बैठकों, रणनीतिक चर्चाओं और संगठनात्मक प्रयासों का दौर जारी है। सभी पार्टियां अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति को सफल बनाने में जुटी हुई हैं।

फिलहाल नजर इस बात पर है कि उम्मीदवार चयन को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में किस दिशा में जाते हैं और क्या विपक्षी दल अपने मतभेदों को सुलझाकर चुनावी मैदान में एकजुटता का प्रदर्शन कर पाते हैं।

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