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MedicalNegligence – केरल में सर्जरी के पांच साल बाद पेट में मिला औजार

MedicalNegligence – केरल के अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुन्नप्रा निवासी उषा जोसेफ के पेट में ऑपरेशन के लगभग पांच साल बाद एक सर्जिकल उपकरण मिलने की पुष्टि हुई है। हाल ही में कराए गए एक्स-रे परीक्षण में आर्टरी फोर्सेप्स दिखाई देने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

लंबे समय से दर्द, जांच में खुलासा

परिवार के अनुसार, उषा जोसेफ ने पांच वर्ष पहले अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में सर्जरी कराई थी। ऑपरेशन के बाद से ही उन्हें बीच-बीच में पेट में असहजता और दर्द की शिकायत रहती थी। शुरुआत में इसे सामान्य दुष्प्रभाव मानकर दवाइयों से राहत देने की कोशिश की गई। लेकिन हाल के दिनों में दर्द बढ़ने पर दोबारा जांच कराई गई। एक्स-रे रिपोर्ट में पेट के भीतर धातु जैसी वस्तु नजर आने के बाद डॉक्टरों ने विस्तृत परीक्षण किया, जिसमें सर्जिकल औजार होने की पुष्टि हुई।

यह खुलासा परिवार के लिए हैरान करने वाला था। उषा जोसेफ का कहना है कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सर्जरी के दौरान कोई उपकरण शरीर के अंदर छूट सकता है। फिलहाल उनकी स्थिति की निगरानी की जा रही है और आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के आदेश

मामले के सामने आने के बाद राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा है कि घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी पारदर्शिता से की जाएगी और यदि लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित सर्जरी से जुड़े दस्तावेजों, ऑपरेशन थिएटर की प्रक्रिया और उस समय की मेडिकल टीम की भूमिका की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उपकरण किस परिस्थिति में शरीर के भीतर रह गया और पोस्ट-ऑपरेटिव जांच में यह कैसे नहीं पकड़ा गया।

अस्पताल प्रशासन की प्रारंभिक प्रतिक्रिया

अस्पताल प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर कहा है कि मामले की आंतरिक जांच भी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सर्जरी के दौरान उपकरणों की गिनती और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन के बाद उपकरणों की गणना और सत्यापन एक नियमित प्रक्रिया होती है। यदि यह प्रक्रिया सही ढंग से लागू न हो तो इस तरह की घटनाएं संभव हैं। हालांकि ऐसे मामले दुर्लभ माने जाते हैं, लेकिन जब सामने आते हैं तो स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर डालते हैं।

मरीज सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों में निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी प्रगति के बावजूद मानवीय चूक को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, इसलिए निगरानी और जवाबदेही की प्रणाली मजबूत होना जरूरी है।

उषा जोसेफ के मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि गलती किस स्तर पर हुई। फिलहाल राज्य स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।

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