राष्ट्रीय

Landslide – वायनाड सुरंग हादसे में लापता निर्माण प्रबंधक की तलाश तेज, नदी और मलबे में जारी व्यापक अभियान

Landslide – वायनाड में सुरंग निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन के बाद लापता निर्माण प्रबंधक विक्रम राणा की तलाश लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। बचाव अभियान में लगी विभिन्न एजेंसियां मीनाचिपुझा नदी और हादसे वाली जगह पर जमा मलबे की गहन जांच कर रही हैं। अब तक सात लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश के रहने वाले विक्रम राणा का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।

नदी में तलाशी अभियान को मिली नई गति

राज्य सरकार के अनुसार, मीनाचिपुझा नदी के उस हिस्से में खोज अभियान को और तेज किया गया है जहां पहले गाद और मिट्टी के कारण नदी का तल स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। बीते दो दिनों में ऊपरी क्षेत्र में खुदाई के चलते पानी मटमैला बना हुआ था, लेकिन खुदाई रुकने के बाद पानी साफ होने से बचाव दल अब नदी की सतह और उसमें जमा मलबे की बारीकी से जांच कर पा रहा है।

जोन-2 पर सबसे अधिक ध्यान

केरल सरकार में मंत्री टी. सिद्धीक ने बताया कि राहत एवं बचाव दल का मुख्य फोकस अब भूस्खलन प्रभावित जोन-2 पर है। अधिकारियों का मानना है कि इस हिस्से में गहराई तक खुदाई करने से लापता निर्माण प्रबंधक के संबंध में अहम सुराग मिलने की संभावना है। विक्रम राणा सुरंग परियोजना में निर्माण प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे और हादसे के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।

वीडियो विश्लेषण के आधार पर बदली रणनीति

शुक्रवार को एनडीआरएफ, फायर एंड रेस्क्यू सर्विस तथा अन्य विशेषज्ञ टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया। इसके बाद हुई समीक्षा बैठक में जोन-2 की पूरी तरह खुदाई कर वहां मौजूद मिट्टी और मलबा हटाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज के विश्लेषण से मिले संकेतों के आधार पर इस क्षेत्र में खोज अभियान से बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

बचाव कार्य के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध

मंत्री टी. सिद्धीक ने बताया कि अभियान चला रही एजेंसियों की मांग के अनुसार सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। भारी मशीनें, अतिरिक्त टिपर ट्रक और अन्य जरूरी उपकरण मौके पर लगाए गए हैं। अभियान की प्रगति की लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि राहत कार्य बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।

नदी और मलबे में समानांतर कार्रवाई

बचाव दल एक ओर भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर नदी के निचले हिस्से में भी लगातार तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक विक्रम राणा का पता नहीं चल जाता, तब तक दोनों स्थानों पर खोज अभियान समानांतर रूप से जारी रहेगा।

यातायात पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध

जिला प्रशासन ने बचाव अभियान को सुचारु बनाए रखने के लिए मीनाक्षी पुल के रास्ते चूरलमाला-मेप्पाडी मार्ग पर सामान्य वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी है। केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य वाहनों को निर्धारित समय अंतराल पर गुजरने की अनुमति दी जा रही है ताकि राहत कार्य प्रभावित न हो।

7 जुलाई को हुआ था बड़ा हादसा

7 जुलाई को अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना के निर्माण स्थल पर अचानक भूस्खलन हुआ था। इस दुर्घटना में निर्माण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कई फुट गहरे मलबे में दब गया था। सुरंग परियोजना वायनाड और कोझिकोड जिलों के बीच संपर्क बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।

अब तक सात लोगों की हो चुकी है पुष्टि

हादसे के बाद अब तक सात लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल के पूर्व मिदनापुर निवासी राजेश का शव नदी के निचले हिस्से से मिला था। पहचान की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराकर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की।

सुरक्षित मलबा हटाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित

राज्य सरकार ने सुरंग और टाउनशिप परियोजनाओं में जमा मलबे के सुरक्षित निस्तारण के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति में इंजीनियरिंग और पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो परियोजना स्थलों का निरीक्षण कर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आवश्यक तकनीकी सुझाव देंगे। सरकार ने समिति से जल्द विस्तृत कार्ययोजना और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

अभियान तब तक जारी रहेगा

जिला प्रशासन और एनडीआरएफ ने स्पष्ट किया है कि विक्रम राणा का पता चलने तक खोज अभियान नहीं रोका जाएगा। मलबा हटाने, नदी में तलाशी और प्रभावित क्षेत्रों की व्यवस्थित जांच लगातार जारी रहेगी। पूरे अभियान की निगरानी प्रशासन और बचाव एजेंसियां संयुक्त रूप से कर रही हैं।

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