LabourCodes – चार नई श्रम संहिताओं के खिलाफ देशव्यापी बंद, बंगाल सामान्य
LabourCodes – चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर गुरुवार को देशभर में ट्रेड यूनियनों ने बंद का आह्वान किया, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसका व्यापक असर देखने को नहीं मिला। राज्य के अधिकांश हिस्सों में जनजीवन सामान्य रहा। सरकारी दफ्तरों से लेकर निजी प्रतिष्ठानों तक कामकाज नियमित रूप से चलता रहा और सार्वजनिक परिवहन भी सामान्य ढंग से संचालित होता दिखाई दिया।

संयुक्त ट्रेड यूनियनों का देशव्यापी आह्वान
करीब 14 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर इस बंद का एलान किया था। उनका कहना है कि नई श्रम संहिताएं कामगारों के हितों के विपरीत हैं और इन्हें वापस लिया जाना चाहिए। यूनियनों का आरोप है कि इन कानूनों से श्रमिक अधिकार कमजोर हो सकते हैं और रोजगार सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
इन संगठनों ने यह भी मांग उठाई कि श्रमिकों और किसानों को प्रभावित करने वाली अन्य नीतियों पर भी पुनर्विचार किया जाए। कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के कुछ वर्गों ने भी इस बंद को समर्थन दिया। यूनियनों का दावा है कि बड़ी संख्या में श्रमिकों ने इस पहल के साथ एकजुटता दिखाई है।
बंगाल में सामान्य जनजीवन
हालांकि देश के विभिन्न हिस्सों में बंद का अलग-अलग असर देखने को मिला, पश्चिम बंगाल अपेक्षाकृत शांत रहा। राजधानी कोलकाता सहित कई जिलों में बाजार खुले रहे और कार्यालयों में उपस्थिति सामान्य रही।
स्कूल और कॉलेज भी तय समय पर खुले। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में किसी बड़े व्यवधान की सूचना नहीं मिली। सड़कों पर आवाजाही सामान्य दिखी और दैनिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हुईं। प्रशासन की ओर से पहले ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां की गई थीं।
विश्वविद्यालय परिसरों में प्रदर्शन
राज्य में बंद का व्यापक असर भले ही नहीं दिखा, लेकिन कुछ शैक्षणिक संस्थानों के बाहर प्रदर्शन हुए। सीपीआईएम की छात्र इकाई एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने जादवपुर विश्वविद्यालय और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वारों पर विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति नियंत्रण में रही और किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं है।
ट्रेड यूनियनों का दावा
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने दावा किया कि देशभर में लगभग 30 करोड़ कर्मचारियों ने बंद का समर्थन किया है। उनके अनुसार, यह विरोध श्रमिकों की व्यापक चिंताओं को दर्शाता है और सरकार को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हालांकि, बंद के वास्तविक प्रभाव को लेकर अलग-अलग राज्यों से भिन्न तस्वीरें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर आंशिक असर देखा गया, जबकि कई राज्यों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं।
आगे की राह
नई श्रम संहिताओं को लेकर सरकार और ट्रेड यूनियनों के बीच मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं। सरकार का कहना है कि ये संहिताएं श्रम कानूनों को सरल और समेकित बनाने के उद्देश्य से लाई गई हैं, जबकि यूनियनें इन्हें श्रमिक अधिकारों के लिए चुनौती मानती हैं।
बंद के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों पक्षों के बीच संवाद की नई पहल होती है या विरोध का स्वर और तेज होता है। फिलहाल, पश्चिम बंगाल में जनजीवन सामान्य रहने से यह संकेत जरूर मिला है कि राज्य में बंद का असर सीमित रहा।



