Judiciary – शिवसेना चुनाव चिह्न विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
Judiciary – शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर जारी कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर गैरजिम्मेदार टिप्पणियां करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने नेताओं और संबंधित पक्षों को मीडिया में संयमित भाषा इस्तेमाल करने की सलाह दी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कुछ नेता अदालत के भीतर सुनवाई टालने के लिए समय मांगते हैं, जबकि बाहर जाकर यह धारणा बना रहे हैं कि मामले में सुनवाई नहीं हो रही है।
अदालत ने मीडिया बयानबाजी पर जताई आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं को लेकर सार्वजनिक मंचों पर गलत संदेश देना उचित नहीं है। पीठ ने साफ किया कि अदालत लगातार मामलों की सुनवाई कर रही है और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने वाली टिप्पणियां अनुचित हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उद्धव ठाकरे गुट के वकील को निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने समर्थकों और नेताओं को मीडिया में संयम बरतने की सलाह दें। अदालत ने टिप्पणी की कि अदालत के अंदर अलग रुख और बाहर अलग बयान देना न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा के अनुकूल नहीं माना जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश ने जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत रोजाना लंबे समय तक मामलों की सुनवाई करती है और न्यायाधीश अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह कहना कि अदालत सुनवाई नहीं कर रही, तथ्यात्मक रूप से गलत और अनुचित है।
पीठ ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपने शब्दों के प्रभाव को समझना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायपालिका को लेकर गैरजिम्मेदार बयान भविष्य में गंभीरता से लिए जा सकते हैं।
शिंदे गुट के वकील ने भी रखा पक्ष
एकनाथ शिंदे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी अदालत की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा दोनों पक्षों को पर्याप्त अवसर दिया है और पूरी निष्पक्षता के साथ सुनवाई की है। उनके अनुसार, अदालत के खिलाफ इस प्रकार की बयानबाजी से बचना चाहिए क्योंकि इससे न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
रोहतगी ने यह भी कहा कि अदालत लगातार मामले को सुन रही है और प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने न्यायिक मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अगली सुनवाई की तारीख तय
सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अदालत को भरोसा दिलाया कि कानूनी टीम न्यायपालिका के प्रति पूरा सम्मान रखती है। उन्होंने कहा कि वकील किसी भी तरह की अनुचित टिप्पणी का समर्थन नहीं करते और अदालत जब भी उचित समझे, वे बहस के लिए तैयार हैं।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस मामले पर अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।