WorkFromHome – पीएम की अपील के बीच घर से काम पर तेज हुई चर्चा, जानें इसका सेहत पर क्या पड़ेगा असर…
WorkFromHome – मध्य-पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में भी ईंधन की कीमतों पर असर दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने के लिए कुछ व्यवहारिक कदम अपनाने की अपील की है। इसी क्रम में उन्होंने एक बार फिर “वर्क फ्रॉम होम” जैसे विकल्पों को अपनाने की बात कही है, ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी घर से काम करते हैं तो रोजाना यात्रा में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की बचत हो सकती है। हालांकि इसके साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी याद दिला रहे हैं कि लंबे समय तक घर से काम करने के अपने कई शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी हो सकते हैं।
कोविड काल में तेजी से बढ़ा था वर्क फ्रॉम होम
कोविड महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था बड़े स्तर पर अपनाई गई थी। उस समय इसका उद्देश्य संक्रमण की श्रृंखला को रोकना और लोगों को सुरक्षित रखना था। लाखों कर्मचारियों ने घर से काम किया, जिससे यात्रा और दफ्तर आने-जाने में होने वाला समय बचा।
इसके अलावा कंपनियों के परिचालन खर्च में भी कमी देखी गई। कर्मचारियों को परिवार के साथ अधिक समय बिताने का मौका मिला और ईंधन की खपत भी कम हुई। लेकिन धीरे-धीरे इसके स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे।
लंबे समय तक बैठकर काम करने का असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार घर से काम करते समय अधिकतर लोग घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं। ऑफिस में जहां लोगों को मीटिंग, सीढ़ियां चढ़ने और इधर-उधर चलने का मौका मिलता है, वहीं घर में शारीरिक गतिविधि काफी कम हो जाती है।
लंबे समय तक लैपटॉप के सामने बैठने से कमर दर्द, गर्दन में जकड़न और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि लगातार बैठे रहने से मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर
वर्क फ्रॉम होम का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार घर में रहने और सामाजिक संपर्क कम होने से कई लोगों में अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है।
ऑफिस का माहौल, सहकर्मियों से बातचीत और टीम गतिविधियां मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। लेकिन लंबे समय तक अलग-थलग रहने से तनाव, चिंता और चिड़चिड़ापन बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। लगातार ऑनलाइन मीटिंग और डिजिटल स्क्रीन पर काम करने से “डिजिटल बर्नआउट” का खतरा भी बढ़ता है।
गलत पोस्चर से बढ़ सकती हैं समस्याएं
विशेषज्ञों का कहना है कि घर में काम करने के दौरान लोग अक्सर बिस्तर, सोफे या डाइनिंग टेबल पर बैठकर काम करते हैं। लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठने से रीढ़ और गर्दन पर दबाव बढ़ता है।
लगातार झुककर स्क्रीन देखने से सर्वाइकल दर्द और पीठ की समस्या तेजी से बढ़ सकती है। इसके अलावा बार-बार स्नैकिंग और अनियमित खानपान भी वजन बढ़ने का कारण बन सकते हैं।
स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर असर
वर्क फ्रॉम होम के दौरान मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट का उपयोग काफी बढ़ जाता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है, जिससे डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या हो सकती है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की शारीरिक गतिविधि करते रहना जरूरी है। इससे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।