राष्ट्रीय

HighCourt – 31 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग के समयपूर्व प्रसव को मिली अनुमति

HighCourt- केरल हाईकोर्ट ने 15 वर्षीय गर्भवती छात्रा से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए 31 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान समयपूर्व प्रसव कराने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह निर्णय मेडिकल बोर्ड की विशेषज्ञ राय, नाबालिग की स्वास्थ्य स्थिति और उसके परिवार की इच्छा को ध्यान में रखते हुए दिया। मामला उस याचिका पर आधारित था, जिसमें छात्रा की मां ने अदालत से गर्भावस्था समाप्त करने अथवा चिकित्सकीय निगरानी में समय से पहले प्रसव कराने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट बनी फैसले का आधार

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें नाबालिग की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया था। उपलब्ध चिकित्सकीय राय पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता देना आवश्यक है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे मामलों में चिकित्सा संबंधी निर्णय पूरी सावधानी और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही लिए जाने चाहिए।

नाबालिग और परिवार की इच्छा को भी दिया महत्व

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित छात्रा अभी नाबालिग है और अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि नाबालिग और उसके परिवार दोनों की इच्छा गर्भावस्था को आगे जारी रखने की नहीं है। न्यायालय ने माना कि ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष की परिस्थितियों और उसकी इच्छा पर भी गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक होता है।

चिकित्सकीय निगरानी में होगी आगे की प्रक्रिया

अदालत ने निर्देश दिया कि समयपूर्व प्रसव की पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में और निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुसार ही संपन्न कराई जाए। न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि नाबालिग को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और समुचित देखभाल उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसकी सेहत और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

संवेदनशील मामलों में संतुलित दृष्टिकोण जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश के माध्यम से संकेत दिया कि नाबालिगों से जुड़े ऐसे मामलों में कानूनी, चिकित्सकीय और मानवीय पहलुओं के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। अदालत ने माना कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और निर्णय उपलब्ध तथ्यों, मेडिकल रिपोर्ट तथा संबंधित पक्ष की स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।

याचिका पर सुनवाई के बाद जारी हुआ आदेश

यह मामला छात्रा की मां द्वारा दायर याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, नाबालिग की स्थिति और परिवार के पक्ष को विस्तार से सुना। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने समयपूर्व प्रसव की अनुमति प्रदान करते हुए संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रिया नियमानुसार पूरी करने के निर्देश दिए।

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