स्वास्थ्य

Fertility – 35 वर्ष के बाद मातृत्व में बढ़ती चुनौतियों पर हुए नए अध्ययन ने बढ़ाई चिंता

Fertility – गर्भधारण से जुड़ी नई वैश्विक रिपोर्ट ने महिलाओं की प्रजनन क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। अध्ययन के अनुसार, 35 वर्ष या उससे अधिक आयु की बड़ी संख्या में महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिरता जैसे कारणों से मातृत्व की योजना लगातार टल रही है, जबकि जैविक उम्र अपनी गति से आगे बढ़ती रहती है।

वैश्विक अध्ययन में सामने आए चिंताजनक आंकड़े

चीन की चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1990 से 2023 के बीच 204 देशों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोध के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया भर में 35 से 49 वर्ष की लगभग 5.36 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें सामान्य तरीके से गर्भधारण करने में कठिनाई हो रही है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो वर्ष 2036 तक यह संख्या बढ़कर करीब 7.96 करोड़ तक पहुंच सकती है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि 1990 की तुलना में अब इस समस्या का प्रसार अधिक दर्ज किया जा रहा है।

उम्र बढ़ने के साथ क्यों घटती है प्रजनन क्षमता

विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं के शरीर में अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता समय के साथ स्वाभाविक रूप से कम होती जाती है। 35 वर्ष के बाद यह प्रक्रिया तेज हो सकती है और 40 वर्ष के आसपास गर्भधारण की संभावना पहले की तुलना में काफी घट जाती है। यही कारण है कि परिवार शुरू करने का निर्णय अधिक उम्र में लेने पर कई महिलाओं को अतिरिक्त चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

जीवनशैली भी बन रही अहम वजह

रिपोर्ट केवल बढ़ती उम्र को ही जिम्मेदार नहीं मानती। डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा, लगातार मानसिक तनाव, धूम्रपान, शराब का सेवन और असंतुलित जीवनशैली भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। आधुनिक जीवनशैली से जुड़े ये जोखिम गर्भधारण की प्रक्रिया को और जटिल बना सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय रहते स्वस्थ आदतें अपनाने की सलाह देते हैं।

शिक्षा और करियर के कारण बदल रहा मातृत्व का समय

शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले की तुलना में अधिक महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, पेशेवर जीवन में आगे बढ़ रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह सामाजिक बदलाव सकारात्मक माना जाता है, लेकिन इसके साथ परिवार बढ़ाने का निर्णय अक्सर बाद के वर्षों तक टल जाता है। इसी दौरान जैविक प्रजनन क्षमता में धीरे-धीरे कमी आती रहती है, जिससे भविष्य में गर्भधारण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आयु वर्ग के आधार पर जोखिम का आकलन

अध्ययन में महिलाओं को 35-39 वर्ष, 40-44 वर्ष और 45-49 वर्ष के तीन समूहों में विभाजित कर विश्लेषण किया गया। इसमें ऐसे मामलों को शामिल किया गया, जहां एक वर्ष तक नियमित वैवाहिक संबंध और गर्भनिरोधक का उपयोग न करने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाया। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में तीनों आयु वर्गों में प्रजनन संबंधी समस्याओं में वृद्धि होगी, हालांकि सबसे तेज बढ़ोतरी 35 से 39 वर्ष की महिलाओं के समूह में दर्ज की जा सकती है।

विशेषज्ञों ने समय पर चिकित्सीय परामर्श की दी सलाह

‘द लैंसेट ऑब्सटेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड विमेंस हेल्थ’ में प्रकाशित निष्कर्षों के आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गर्भधारण की योजना बनाई जा रही है तो समय रहते चिकित्सीय सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। आज पहले की तुलना में अधिक महिलाएं Fertility Test और IVF जैसी चिकित्सा सेवाओं का सहारा ले रही हैं, जिससे ऐसे मामलों की पहचान भी बढ़ी है। चिकित्सकों का मानना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित जीवनशैली कई जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है।

मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भधारण में कठिनाई केवल स्वास्थ्य तक सीमित मुद्दा नहीं है। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य, वैवाहिक संबंधों, सामाजिक जीवन और उपचार पर होने वाले आर्थिक खर्च पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता कई परिवारों के लिए अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है। इसी कारण विशेषज्ञ इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने और समय पर परामर्श लेने पर जोर देते हैं।

गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य तैयारी पर बढ़ रहा ध्यान

बढ़ती प्रजनन चुनौतियों के बीच गर्भधारण से पहले शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की अवधारणा भी चर्चा में है। आयुर्वेद में वर्णित ‘गर्भाधान संस्कार’ को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका उद्देश्य भावी माता-पिता को संतुलित खानपान, स्वस्थ दिनचर्या, मानसिक तैयारी और आवश्यक परामर्श के माध्यम से गर्भधारण के लिए तैयार करना है। हालांकि किसी भी उपचार या स्वास्थ्य पद्धति को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

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