राष्ट्रीय

FuelPrice – पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर राहुल गांधी मे किया हमला

FuelPrice – देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल में ईंधन दरों में हुई लगातार बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। राहुल गांधी का कहना है कि लगातार बढ़ रही कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और आम परिवारों के खर्च पर पड़ रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे की जा रही है ताकि जनता पर पड़ने वाला असर एक साथ दिखाई न दे। उन्होंने यह भी कहा कि बीते कुछ महीनों से आर्थिक दबाव को लेकर चर्चा हो रही थी, लेकिन चुनावी व्यस्तताओं के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने भी जताई चिंता

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ईंधन की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे घरेलू बजट और बाजार व्यवस्था पर पड़ता है।

खरगे के मुताबिक, परिवहन खर्च बढ़ने से जरूरी सामानों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान, छोटे कारोबारी और आम उपभोक्ता सभी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई पहले से ही लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

हाल के दिनों में कितनी बढ़ीं कीमतें

बीते कुछ दिनों में ईंधन की कीमतों में कई बार बदलाव किया गया है। 15 मई को पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बाद 19 मई को दोनों ईंधनों के दाम करीब 90 पैसे प्रति लीटर बढ़े।

23 मई को फिर कीमतों में इजाफा हुआ, जिसमें पेट्रोल लगभग 87 पैसे और डीजल करीब 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ। लगातार हो रही इन बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन लोगों की जो रोजमर्रा के कामों के लिए निजी वाहनों या परिवहन सेवाओं पर निर्भर हैं।

वैश्विक कारणों का भी पड़ रहा असर

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी घरेलू ईंधन दरों को प्रभावित कर रही हैं। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भी तेल कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा होता है तो उसका असर धीरे-धीरे घरेलू बाजार में दिखाई देने लगता है। तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के कारण उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है, तो इसका असर परिवहन लागत और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में इजाफा होने की संभावना रहती है।

यही वजह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को केवल ऊर्जा क्षेत्र का मुद्दा नहीं माना जाता, बल्कि यह सीधे आम लोगों की आर्थिक स्थिति और बाजार की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ विषय है।

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