राष्ट्रीय

Elections – आरजी कर मामले पर सियासी सरगर्मी, दीप्शिता धर की प्रतिक्रिया

Elections – कोलकाता से सटे इलाकों में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल धीरे-धीरे गर्म होता जा रहा है। इसी बीच माकपा की युवा नेता दीप्शिता धर ने आरजी कर अस्पताल से जुड़े दुष्कर्म और हत्या मामले को लेकर एक बार फिर अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। उन्होंने पीड़िता की मां के संभावित रूप से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा पर निराशा व्यक्त की, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि उनके लिए यह चुनाव किसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से अधिक न्याय की लड़ाई है।

न्याय की मांग से जुड़ा भावनात्मक पहलू
दीप्शिता धर, जो दमदम उत्तर सीट से चुनाव मैदान में हैं, ने कहा कि यह चुनाव उनके लिए शुरू से ही भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। उनका कहना है कि जिस इलाके से वे चुनाव लड़ रही हैं, उसके पास ही उस युवती का घर है, जिसकी दर्दनाक मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। धर के मुताबिक, उस घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में कई सवाल अनुत्तरित हैं और असली दोषियों तक पहुंचने में अब भी देरी हो रही है।

महिलाओं की सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाया
धर ने अपने चुनावी अभियान का केंद्र महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक हिंसा के खिलाफ संघर्ष को बनाया है। उनका मानना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज में महिलाओं की स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य में कई महिलाएं अब भी असुरक्षित महसूस करती हैं और यह स्थिति बदलने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उनके अनुसार, चुनाव के जरिए वे इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाना चाहती हैं ताकि नीतिगत बदलाव संभव हो सके।

पीड़िता की मां की संभावित उम्मीदवारी पर प्रतिक्रिया
पीड़िता की मां द्वारा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताने पर धर ने कहा कि यह व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन इससे उनकी अपनी लड़ाई और रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना है। भाजपा की ओर से अभी तक इस संभावित उम्मीदवारी पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

मतदाता सूची और SIR पर उठाए सवाल
धर ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के चलते कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर वर्गों—जैसे श्रमिक, महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदाय—को विशेष रूप से प्रभावित किया गया है। उनके अनुसार, इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं और लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।

राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर आरोप
ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए धर ने कहा कि जो वादे किए गए थे, वे जमीन पर नजर नहीं आते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से दिए गए बयान और वास्तविक कार्रवाई में अंतर है। साथ ही, उन्होंने जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर सब कुछ सही तरीके से होता, तो लोगों के मन में इतने संदेह नहीं होते।

माकपा की रणनीति और राजनीतिक लक्ष्य
धर ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी पार्टी के सामने इस चुनाव में कई चुनौतियां हैं। पिछले चुनावों में खोए हुए समर्थन को वापस पाना और विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि राज्य के लोगों के लिए बेहतर नीतियां और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है।

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