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ElectionCommission – बंगाल में चुनाव घोषणा के बाद प्रशासनिक फेरबदल, नए अधिकारी नियुक्त

ElectionCommission – पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग ने रविवार देर रात राज्य के दो शीर्ष प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारियों को उनके पद से हटाने का फैसला किया। आयोग के आदेश के अनुसार मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में तत्काल बदलाव लागू कर दिया गया है। चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया बताया जा रहा है।

नए मुख्य सचिव और गृह सचिव की नियुक्ति

चुनाव आयोग के आदेश के बाद राज्य के नए मुख्य सचिव के रूप में दुष्यंत नारियावाला को नियुक्त किया गया है। वहीं संघमित्रा घोष को गृह सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने इन अधिकारियों को जल्द से जल्द अपना पदभार संभालने के निर्देश दिए हैं ताकि चुनाव से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके। गृह विभाग चुनावी अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इस पद को काफी संवेदनशील माना जाता है।

पुलिस विभाग में भी हुए कई अहम बदलाव

प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ पुलिस विभाग में भी कई महत्वपूर्ण तबादले किए गए हैं। 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार नंद को कोलकाता का नया पुलिस आयुक्त बनाया गया है। इसके अलावा 1992 बैच के अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को महानिदेशक और सूचना एवं सरकारी प्रमुख (प्रभारी) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसी क्रम में 1991 बैच के नटराजन रमेश बाबू को सुधार सेवा विभाग का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त महानिदेशक और सूचना एवं सरकारी प्रमुख (कानून-व्यवस्था) के पद पर तैनात किया गया है। इन सभी अधिकारियों की नियुक्ति से जुड़े आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।

और भी बदलाव की संभावना

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में पुलिस विभाग के कुछ अन्य शीर्ष पदों पर भी बदलाव संभव है। जानकारी मिल रही है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त के पद पर भी फेरबदल किया जा सकता है। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और इस दौरान चुनाव आयोग को प्रशासनिक स्तर पर व्यापक अधिकार मिल जाते हैं। आयोग आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश दे सकता है ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सके।

दुश्यंत नारियावाला का प्रशासनिक अनुभव

नए मुख्य सचिव बने दुष्यंत नारियावाला वर्ष 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह राज्य सरकार के उत्तर बंगाल विकास विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा वे अतिरिक्त प्रभार के तौर पर सिंचाई विभाग का काम भी देख चुके हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें सोमवार दोपहर तीन बजे तक अपना पदभार संभालने का निर्देश दिया है।

बंगाल में दो चरणों में होगा मतदान

रविवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित किया गया है। राज्य में मतगणना चार मई को होगी।

निर्वाचन कार्यक्रम के तहत पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को जारी की जाएगी, जबकि दूसरे चरण की अधिसूचना दो अप्रैल को जारी होगी। पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अप्रैल रखी गई है और दूसरे चरण के लिए नौ अप्रैल तक नामांकन किया जा सकेगा। इसके बाद क्रमशः सात अप्रैल और दस अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। उम्मीदवार पहले चरण के लिए नौ अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 13 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकते हैं।

चुनाव के दौरान लागू होती है आचार संहिता

चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। यह नियम राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए तय किए गए दिशा-निर्देशों का एक समूह होता है, जिसे सभी दलों की सहमति से तैयार किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

आचार संहिता चुनाव की घोषणा के साथ लागू हो जाती है और पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक प्रभावी रहती है। विधानसभा चुनावों के दौरान यह पूरे राज्य में लागू होती है और इसका उद्देश्य प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग रोकना और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना होता है।

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