Election – केरल में माकपा को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता जी सुधाकरन ने छोड़ी पार्टी
Election – केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। वामपंथी दल माकपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता जी सुधाकरन ने गुरुवार को संगठन से अपने सभी संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने अलप्पुझा जिले के अंबलप्पुझा विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला भी सार्वजनिक किया। यह इलाका लंबे समय से माकपा का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता रहा है।

पार्टी सदस्यता नवीनीकरण से किया इंकार
सुधाकरन ने हाल ही में संकेत दे दिया था कि वह पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराएंगे। उनके इस निर्णय ने राजनीतिक हलकों में पहले ही चर्चाएं तेज कर दी थीं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से पार्टी से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया मंचों पर उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां की जा रही थीं। इसी घटनाक्रम के बाद उन्होंने संगठन से दूरी बनाने का अंतिम निर्णय लिया।
उनका कहना है कि यह फैसला उन्होंने सोच-समझकर लिया है और अब वे चुनावी मैदान में स्वतंत्र रूप से उतरकर मतदाताओं के बीच जाएंगे।
स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने की घोषणा
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुधाकरन ने स्पष्ट किया कि वे अंबलप्पुझा से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक गठबंधन से समर्थन मांगने का उनका इरादा नहीं है।
उन्होंने कहा कि यूडीएफ से समर्थन मिलने या मांगे जाने की चर्चाएं पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार उन्होंने न तो किसी दल से संपर्क किया है और न ही किसी तरह की राजनीतिक बातचीत की है। उनका कहना था कि चुनाव लड़ने का निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत है और वे इसे स्वतंत्र तरीके से ही आगे बढ़ाएंगे।
चुनाव प्रचार की अलग रणनीति
पूर्व मंत्री ने यह भी बताया कि उनका चुनाव प्रचार पारंपरिक राजनीतिक अभियानों से अलग होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न तो दीवारों पर पोस्टर या चित्रकारी कराएंगे और न ही बड़े राजनीतिक सम्मेलन आयोजित करेंगे।
उनका कहना है कि वे सीधे मतदाताओं के बीच जाकर संवाद करने पर जोर देंगे। उनके मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य रूप से राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी ताकि मतदाताओं को वास्तविक सवालों और नीतिगत विषयों पर जानकारी मिल सके।
सरकार के खिलाफ बयानबाजी से दूरी
सुधाकरन ने कहा कि वे चुनाव प्रचार के दौरान सरकार के खिलाफ व्यक्तिगत या तीखी आलोचना करने से बचेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य में किसी तरह की सत्ता विरोधी लहर मौजूद है या नहीं।
हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर वे खुलकर अपनी बात रखेंगे। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण विषय हैं और इन पर चर्चा होना आवश्यक है।
पार्टी नेतृत्व से संपर्क न करने का दावा
सुधाकरन ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी मुख्यमंत्री या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से टिकट या हस्तक्षेप की मांग नहीं की। उनके अनुसार पार्टी के भीतर उठे कुछ मुद्दों को उन्होंने स्थानीय स्तर पर ही सुलझाने की कोशिश की थी और इस संबंध में राज्य समिति के सामने कोई औपचारिक शिकायत भी दर्ज नहीं कराई।
उन्होंने मीडिया में चल रही कुछ खबरों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि उनके नाम से कई बयान प्रकाशित हुए जो वास्तविकता से मेल नहीं खाते। विशेष रूप से यूडीएफ के समर्थन से चुनाव लड़ने की बात को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया।
लंबे राजनीतिक सफर का उल्लेख
सुधाकरन ने अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए बताया कि वे लगभग 68 वर्ष पहले, जब वे स्कूल में पढ़ते थे, उसी समय पार्टी से जुड़े थे। बाद में 1967 में एसएन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हो गए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि हालिया घटनाक्रम के बावजूद पार्टी के किसी शीर्ष नेता ने उनसे सुलह के लिए संपर्क नहीं किया, हालांकि कुछ नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात जरूर की थी।



