EducationNews – छात्रों के प्रदर्शन पर राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब
EducationNews– लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देशभर में युवा शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंता जता रहे हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ सख्ती बरती जा रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने कहा कि जिन युवाओं का भविष्य शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली पर निर्भर है, उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, छात्र लगातार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकार की प्राथमिकता संवाद स्थापित करना होनी चाहिए, न कि बल प्रयोग के जरिए विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करना।
प्रधानमंत्री से माफी की मांग
विपक्ष के नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को देखते हुए प्रधानमंत्री को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ बल प्रयोग न किया जाए। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और उसकी रक्षा की जानी चाहिए।
संसद में विस्तृत चर्चा की उठाई मांग
राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के सांसदों के साथ लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर इस पूरे मामले को संसद में उठाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर विस्तृत चर्चा आवश्यक है, ताकि सरकार अपना पक्ष स्पष्ट कर सके और प्रभावित छात्रों की चिंताओं का समाधान तलाशा जा सके। उनके अनुसार, शिक्षा से जुड़े विषय राष्ट्रीय महत्व के हैं और इन पर संसद में गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए।
विपक्ष ने मुद्दा उठाते रहने की कही बात
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष छात्रों से जुड़े इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि लोकतांत्रिक तरीकों से उनकी आवाज को आगे भी उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े प्रश्नों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है और विपक्ष इस विषय पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।