EducationControversy – सीबीएसई मूल्यांकन प्रणाली विवाद पर कांग्रेस ने दागे तीखे सवाल
EducationControversy – सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मामले में केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि परीक्षा और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों ने बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को असमंजस और मानसिक तनाव की स्थिति में डाल दिया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि मामले के सामने आने के बाद भी संबंधित संस्थाओं की ओर से पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
जयराम रमेश ने उठाए कई सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि लंबे समय तक साइबर सुरक्षा संबंधी समस्याओं से इनकार किए जाने के बाद सीबीएसई ने अंततः स्वीकार किया कि उसकी ओएसएम प्रणाली प्रभावित हुई थी। उन्होंने पूछा कि इस मामले में तकनीकी सेवा प्रदान करने वाली कंपनी COEMPT के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।
उनका कहना है कि छात्रों के हितों से जुड़े मामलों में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता अपेक्षित है, विशेषकर तब जब परीक्षा प्रक्रिया सीधे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी हो।
निविदा प्रक्रिया को लेकर भी विपक्ष की आपत्ति
कांग्रेस ने इस मुद्दे को निविदा प्रक्रिया से भी जोड़ा है। जयराम रमेश का आरोप है कि अगस्त 2025 में जारी कुछ शर्तों में ऐसी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान था जो निर्धारित मानकों का पालन नहीं करतीं। उनका दावा है कि बाद में इन शर्तों में बदलाव किया गया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।
पार्टी ने मांग की है कि इस बदलाव के कारणों को सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में किन मानकों को अपनाया गया था। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने इस विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी निशाने पर लिया है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सामने आई खामियों के मद्देनजर मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। इसी आधार पर कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग दोहराई है।
विपक्ष का तर्क है कि छात्रों से जुड़े संवेदनशील मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है ताकि शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे।
पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पर पहले भी उठे थे सवाल
इससे पहले भी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया चर्चा में रही थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पुनर्मूल्यांकन शुल्क और प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को बेहतर सेवाएं देना होना चाहिए और किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारना आवश्यक है।
मामला तब सामने आया जब कक्षा 12 के कुछ विद्यार्थियों ने शिकायत की कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर दिखाई गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी नहीं थीं। शिकायतों के बाद सीबीएसई ने संबंधित छात्रों से संपर्क किया और सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं।
विशेषज्ञों की सहायता से जांच जारी
मामले की तकनीकी जांच के लिए आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। संबंधित एजेंसियां सिस्टम की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रही हैं ताकि समस्या के कारणों का पता लगाया जा सके।
साथ ही, पोर्टल और भुगतान प्रणाली की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में भी काम चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी सुधारों के जरिए भविष्य में ऐसी समस्याओं की संभावना को कम किया जा सकता है।
कंपनी को लेकर भी उठ रहे हैं प्रश्न
विवाद के केंद्र में मौजूद कंपनी COEMPT को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि कंपनी अपने पुराने नाम ग्लोबअरीना के समय से विभिन्न विवादों में चर्चा का विषय रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।