Education – लखनऊ के संबद्ध कॉलेज की सोसायटी रद्द, 800 छात्रों की पढ़ाई पर बढ़ी चिंता
Education – राजधानी लखनऊ के तेलीबाग स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध राम भरोसे मैकूलाल महाविद्यालय की संचालक सोसायटी का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार ने 25 जुलाई को जारी आदेश में संस्था का पंजीकरण और उसका नवीनीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला सुनाया। इस कार्रवाई के बाद महाविद्यालय में बीए और बीकॉम की पढ़ाई कर रहे करीब 800 विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

पंजीकरण रद्द करने के पीछे बताए गए आधार
आधिकारिक आदेश के अनुसार, सोसायटी का पंजीकरण सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 की धारा 12-डी के तहत निरस्त किया गया है। विभाग ने इस निर्णय के लिए तीन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया है। इनमें संस्था के नाम को भ्रामक बताया जाना, लोकनीति के प्रतिकूल गतिविधियों का आरोप तथा पंजीकरण के दौरान रजिस्ट्रार कार्यालय को कथित रूप से गलत जानकारी देकर अनुमति प्राप्त करना शामिल है। आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों और जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
भूमि से जुड़े विवाद का भी उल्लेख
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि जिस भूमि पर निजी महाविद्यालय संचालित किया जा रहा है, वह मूल रूप से एक इंटर कॉलेज के लिए आवंटित थी। आदेश में उल्लेख है कि वर्ष 1959 में राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत लगभग 21.125 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की थी, जिसका उद्देश्य राम भरोसे मैकूलाल हायर सेकेंडरी स्कूल के संचालन के लिए व्यवस्था करना था। साथ ही यह भी कहा गया कि भूमि के पट्टे से संबंधित प्रक्रिया में आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार इस प्रकार की कार्रवाई के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक से अनुमति आवश्यक होती है।
कई अवसर मिलने के बावजूद नहीं मिला संतोषजनक जवाब
डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश में यह भी कहा गया है कि संस्था के प्रबंधक को छह बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इसके अतिरिक्त उन्हें अपना पक्ष रखने और सुनवाई में शामिल होने का अवसर भी प्रदान किया गया। हालांकि विभाग का कहना है कि निर्धारित समय के भीतर ऐसा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे लगाए गए आरोपों का संतोषजनक समाधान हो सके। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पंजीकरण समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
अपील का विकल्प और प्रबंधन का पक्ष
वर्तमान नियमों के अनुसार, इस आदेश के खिलाफ संबंधित पक्ष एक माह के भीतर मंडलायुक्त के समक्ष अपील दायर कर सकता है। महाविद्यालय के प्रबंधक श्रीकांत साहू ने कहा है कि संस्था को बंद नहीं होने दिया जाएगा और वे न्यायालय का रुख करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे मामले के पीछे कुछ व्यक्तियों की भूमिका है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
विश्वविद्यालय करेगा आदेश का परीक्षण
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार भावना मिश्रा ने कहा कि फिलहाल उन्हें आदेश की आधिकारिक प्रति प्राप्त नहीं हुई है। दस्तावेज मिलने के बाद विश्वविद्यालय पूरे मामले का परीक्षण करेगा और नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लिए जाएंगे। वहीं, छात्रों और अभिभावकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगे की प्रक्रिया में पढ़ाई और शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।