Diplomacy – 12 वर्षों में बदली भारत की विदेश नीति, जयशंकर ने गिनाईं प्रमुख उपलब्धियां
Diplomacy – केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की विदेश नीति और विदेश मंत्रालय के कामकाज में आए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय कूटनीति का दायरा बढ़ा है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराई गई हैं। उनके अनुसार, विदेश मंत्रालय ने आम नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रक्रियाओं को सरल और अधिक प्रभावी बनाया है।

पासपोर्ट सेवाओं को बनाया गया अधिक सुगम
विदेश मंत्री ने बताया कि बीते 12 वर्षों में पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। दस्तावेजों के सत्यापन से लेकर आवेदन प्रक्रिया तक कई स्तरों पर सुधार किए गए, जिससे नागरिकों को कम समय में सेवाएं मिल सकें। इसका लाभ देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लाखों लोगों को मिला है।
विदेशों में भारतीयों की सहायता व्यवस्था मजबूत हुई
जयशंकर ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे भारतीयों के हितों की रक्षा के लिए दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों की भूमिका को और सशक्त किया गया। भारतीय समुदाय कल्याण कोष के उपयोग का दायरा बढ़ाया गया, जिससे जरूरतमंद भारतीयों को आपात परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
डिजिटल माध्यमों से शिकायतों के समाधान पर जोर
विदेश मंत्रालय ने नागरिकों की शिकायतों और सुझावों के त्वरित निपटारे के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इन माध्यमों के जरिए विदेशों में रहने वाले भारतीय सीधे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। मंत्रालय का दावा है कि इससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों में सुधार हुआ है।
संकट के समय निकासी अभियानों में सक्रिय भूमिका
विदेश मंत्री ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान चलाए गए निकासी अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, अफगानिस्तान, सूडान और इस्राइल जैसे देशों में उत्पन्न कठिन परिस्थितियों के दौरान भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए त्वरित कार्रवाई की। इन अभियानों को भारतीय कूटनीति की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
वैश्विक रोजगार अवसरों तक पहुंच बढ़ी
जयशंकर के अनुसार, भारत ने कई देशों के साथ गतिशीलता साझेदारियां स्थापित की हैं, जिससे भारतीय पेशेवरों और कामगारों के लिए नए अवसर खुले हैं। अब तक 21 ऐसी साझेदारियां विकसित की जा चुकी हैं, जिनका उद्देश्य भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
व्यापार और निर्यात को मिला प्रोत्साहन
विदेश मंत्रालय ने भारतीय कंपनियों और उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सहयोग दिया है। सरकार का प्रयास रहा है कि भारतीय उत्पादों और सेवाओं को नए देशों में पहचान मिले तथा निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। विकास परियोजनाओं के माध्यम से भी भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार किए गए हैं।
छात्रों और संस्कृति के लिए भी हुए विशेष प्रयास
विदेश मंत्री ने कहा कि विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए कई कल्याणकारी पहल शुरू की गई हैं। साथ ही भारतीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत को वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत करने के प्रयास भी तेज किए गए हैं। इससे विभिन्न देशों में भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रभाव को मजबूती मिली है।
दूतावासों के विस्तार से बढ़ी पहुंच
जयशंकर ने जानकारी दी कि विदेशों में भारतीयों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए पिछले वर्षों में 44 नए दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थापित किए गए हैं। इससे विभिन्न देशों में भारतीय नागरिकों को सेवाएं और सहायता अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध हो रही हैं।
प्रधानमंत्री ने भी गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह अवधि विकास, जनकल्याण और सुशासन के लिए समर्पित रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने युवाओं, महिलाओं, किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए काम किया है और आगे भी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य जारी रहेगा।