Chhindwara Poisonous Sweet Case Investigation: 250 गुना ज्यादा जहर से हुईं तीन मौतें, साजिश ऐसी कि कांप जाएगी रूह…
Chhindwara Poisonous Sweet Case Investigation: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में पिछले दिनों हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। जिस मिठाई को लोगों ने प्रसाद या साधारण उपहार समझकर खाया था, वह असल में मौत का सामान (Food Safety Department Report) साबित हुई है। खाद्य विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने इस मामले में एक ऐसा खुलासा किया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।

मिठाई में मिला मौत का जानलेवा पाउडर
खाद्य विभाग की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि लावारिस थैले में मिली उस मिठाई में साधारण मिलावट नहीं थी। लैब टेस्ट में पाया गया है कि मिठाई के भीतर (Arsenic Poisoning Lethal Dose) अत्यधिक मात्रा में चूहा मार दवा मिलाई गई थी। यह कोई मामूली मात्रा नहीं थी, बल्कि सामान्य स्तर से लगभग ढाई सौ गुना अधिक आर्सेनिक पाया गया है, जो किसी भी इंसान को पल भर में मौत की नींद सुलाने के लिए काफी है।
एक हफ्ते में उजड़ गए तीन हंसते-खेलते परिवार
इस जहरीली मिठाई का सेवन करने के बाद इलाके में मातम पसर गया है। 8 जनवरी को जब कुछ लोगों ने अनजाने में इस मिठाई को चखा, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि (Accidental Poisoning Statistics) उनके साथ क्या होने वाला है। मिठाई खाने के एक सप्ताह के भीतर ही तीन लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद से ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए थे।
सामान्य मिलावट नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि यह मिठाई न तो सड़ी-गली थी और न ही इसमें कोई प्राकृतिक खराबी थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि मिठाई में (Toxic Food Adulteration Investigation) जानबूझकर बाहर से जहर मिलाया गया था। फूड इंस्पेक्टर गोपेश मिश्रा के अनुसार, आर्सेनिक की इतनी भारी मात्रा यह दर्शाती है कि इसे किसी बड़ी रंजिश या आपराधिक मंशा को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया था।
पुलिस को अब बिसरा रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार
जुन्नारदेव पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक सबूतों का सहारा ले रही है। मृतकों के शरीर से लिए गए बिसरा के नमूनों को (Forensic Lab Analysis Report) जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। थाना प्रभारी राकेश बघेल का कहना है कि खाद्य विभाग की रिपोर्ट ने जहर की पुष्टि तो कर दी है, लेकिन मौत का सीधा संबंध साबित करने के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट का आना अनिवार्य है, जिसके बाद आरोपियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
आखिर क्या है यह कातिल आर्सेनिक तत्व
आर्सेनिक एक ऐसा घातक रासायनिक तत्व है जिसे ‘खामोश कातिल’ भी कहा जाता है। जब यह शरीर के भीतर पहुंचता है, तो इंसान के आंतरिक अंगों, नसों और त्वचा को (Health Risks of Heavy Metals) बुरी तरह डैमेज कर देता है। जुन्नारदेव के मामले में इसकी मात्रा इतनी ज्यादा थी कि पीड़ितों के शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
लावारिस थैले की मिस्ट्री और पुलिस की तफ्तीश
पुलिस अब उस कड़ी को जोड़ने में जुटी है कि आखिर वह मिठाई वाला थैला वहां तक पहुंचा कैसे। स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है और (Police Criminal Investigation Process) आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच टीम हर उस एंगल पर काम कर रही है जिससे यह पता चल सके कि यह मिठाई किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए रखी गई थी या यह कोई सनकी साजिश थी।
घटनाक्रम की डरावनी टाइमलाइन और वर्तमान स्थिति
इस पूरे मामले की शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी जब वह लावारिस थैला मिला था। उसके बाद शुरू हुआ मौतों का सिलसिला आज (Public Safety Awareness Guidelines) एक बड़ी कानूनी कार्रवाई की दहलीज पर खड़ा है। वर्तमान में पुलिस उन संदिग्धों की लिस्ट तैयार कर रही है जिनका पीड़ित परिवारों से पुराना विवाद रहा हो। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि किसी भी लावारिस खाद्य वस्तु का सेवन न करें।



