AntiTerrorOperation – महाराष्ट्र में पाकिस्तानी गैंग नेटवर्क पर ATS ने की बड़ी कार्रवाई
AntiTerrorOperation – महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड ने राज्य के कई हिस्सों में एक साथ व्यापक अभियान चलाकर कथित अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर नेटवर्क्स के खिलाफ जांच तेज कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई उन गिरोहों से जुड़े संदिग्ध संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल के लिए की जा रही है, जिनके तार पाकिस्तान से संचालित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।

सूत्रों के अनुसार, एटीएस की अलग-अलग टीमों ने बुधवार सुबह राज्यभर में कई स्थानों पर समन्वित छापेमारी की। जांच एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से शाहजाद भट्टी गैंग और डोगरा गैंग से जुड़े संभावित नेटवर्क पर केंद्रित है।
कई शहरों में एक साथ चला अभियान
अधिकारियों ने बताया कि मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, नालासोपारा, मीरा रोड, जलगांव, अकोला और नांदेड़ समेत कई इलाकों में संदिग्ध ठिकानों की तलाशी ली गई। कार्रवाई सुबह के समय शुरू की गई ताकि संभावित डिजिटल और वित्तीय सबूत सुरक्षित किए जा सकें।
एजेंसी का कहना है कि यह अभियान केवल अपराधियों की तलाश तक सीमित नहीं है, बल्कि उन स्थानीय संपर्कों की पहचान करना भी इसका उद्देश्य है जो इन नेटवर्क्स से किसी रूप में जुड़े हो सकते हैं।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंचने की आशंका
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में मिले खुफिया इनपुट में संकेत मिले थे कि कुछ विदेशी नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए महाराष्ट्र के युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसियों को शक है कि अपराध की दुनिया को आकर्षक दिखाकर और तेज कमाई का लालच देकर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
एटीएस अब उन डिजिटल अकाउंट्स और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है, जिनके जरिए कथित तौर पर संपर्क स्थापित किए गए थे। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क भविष्य में संगठित अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर आधार तैयार कर सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की हो रही फॉरेंसिक जांच
छापेमारी के दौरान कई स्थानों से मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियों ने इन उपकरणों को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा है ताकि संपर्कों, चैट रिकॉर्ड, फंडिंग और संभावित योजनाओं की जानकारी जुटाई जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि नेटवर्क की पहुंच कितनी व्यापक थी और किन-किन लोगों से संपर्क बनाए गए थे। फिलहाल साइबर विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें डेटा विश्लेषण में जुटी हुई हैं।
हवाला और फंडिंग एंगल की भी पड़ताल
एटीएस वित्तीय लेनदेन के पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है। एजेंसियों को आशंका है कि विदेशी स्रोतों से हवाला माध्यमों के जरिए धन भेजा गया हो सकता है। इसी कारण संदिग्ध बैंक खातों, लेनदेन रिकॉर्ड और आर्थिक गतिविधियों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान का मकसद किसी भी संभावित आपराधिक या सुरक्षा संबंधी खतरे को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इन नेटवर्क्स का इस्तेमाल राज्य में अवैध हथियारों या संगठित अपराध गतिविधियों के विस्तार के लिए तो नहीं किया जा रहा था।
फिलहाल कई लोगों से पूछताछ जारी है। हालांकि एटीएस ने अभी तक हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की है।