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EnergyCrisis – पश्चिम एशिया तनाव के बीच सरकार ने स्पष्ट की ईंधन की स्थिति

EnergyCrisis – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार लगातार ईंधन आपूर्ति और भंडारण को लेकर निगरानी बनाए हुए है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को कहा कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है तथा लोगों को किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने संभावित संकट को ध्यान में रखते हुए कई स्तरों पर तैयारी की है, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ऊर्जा बचत संबंधी सुझावों को अपनाने की अपील भी दोहराई गई।

सरकार ने ईंधन भंडार को लेकर दी जानकारी

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत के पास फिलहाल लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। इसके अलावा एलएनजी का 60 दिनों और एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक भी सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और देश के किसी हिस्से में ईंधन की कमी नहीं होने दी जाएगी।

पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद घरेलू स्तर पर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में आखिरी बार वर्ष 2022 में बदलाव किया गया था और उसके बाद सरकार ने हालात को नियंत्रित रखने का प्रयास किया।

तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

केंद्रीय मंत्री के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय तेल कंपनियों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात में सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि कुल अंडर रिकवरी का आंकड़ा करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

उन्होंने उद्योग संगठन CII के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि यदि हालिया तिमाही के आंकड़ों को देखा जाए तो नुकसान पहले ही एक लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले जहां 65 डॉलर प्रति बैरल के करीब थीं, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार और कंपनियों दोनों के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत लंबे समय से ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर रहा है, खासकर पश्चिम एशियाई देशों पर। उन्होंने बताया कि देश की जरूरत का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाले तेल और गैस से पूरा होता रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का असर सीधे भारत पर पड़ना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल के वर्षों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। एलपीजी उत्पादन पहले लगभग 35 से 36 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन था, जिसे अब बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य भविष्य में आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है।

लोगों से ऊर्जा बचत की अपील

केंद्रीय मंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुझाए गए उपायों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यकता होने पर वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्प ईंधन की खपत कम करने में मदद कर सकते हैं।

पुरी ने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल की मांग में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, इसके बावजूद किसी भी राज्य में आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है तथा एलपीजी की आपूर्ति भी सामान्य बनी हुई है।

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