Amit Shah: पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज, अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ खोला मोर्चा
Amit Shah: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अमित शाह ने शनिवार को उत्तर 24 परगना जिले में आयोजित एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इस दौरे के दौरान उन्होंने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला और आगामी चुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा। शाह के इस संबोधन ने राज्य की राजनीतिक फिजा को पूरी तरह से चुनावी मोड में ला दिया है।

ममता सरकार की विदाई का दावा
अपने संबोधन की शुरुआत में ही गृहमंत्री ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और टीएमसी सरकार की विदाई का समय नजदीक आ गया है। शाह ने दावा किया कि राज्य में भ्रष्टाचार और अराजकता का बोलबाला है, जिससे लोग अब ऊब चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा इस बार बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने के लिए पूरी तरह तैयार है और जनता के समर्थन से तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर देगी।
घुसपैठ और सुरक्षा का मुद्दा
अमित शाह ने अपने भाषण में राज्य की सुरक्षा और घुसपैठ की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है। शाह के अनुसार, घुसपैठ की इस समस्या के कारण न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा हो रही है। उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा और अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सांस्कृतिक पहचान और वंदे मातरम का अपमान
गृहमंत्री ने केवल राजनीतिक या सुरक्षा के मुद्दों पर ही बात नहीं की, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी जिक्र किया। उन्होंने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि जिस बंगाल की धरती से ‘वंदे मातरम’ का नारा निकला, आज वहीं की सरकार इसके सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने इसे बंगाल की अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राज्य की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और तुष्टिकरण की राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्यकर्ताओं में जोश भरने की रणनीति
उत्तर 24 परगना में हुए इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य संगठन को निचले स्तर तक मजबूत करना था। अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में जुट जाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर बूथ पर भाजपा की पकड़ मजबूत होनी चाहिए ताकि तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव को कम किया जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाह का यह दौरा और उनके आक्रामक तेवर दिखाते हैं कि भाजपा इस बार बंगाल चुनावों को लेकर कितनी गंभीर है और किसी भी मोर्चे पर ढील देने के मूड में नहीं है।
बढ़ता सियासी तनाव और चुनावी समीकरण
पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। अमित शाह के इस दौरे ने जमीनी स्तर पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। जहाँ एक तरफ भाजपा हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और विकास के मुद्दों को लेकर आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी अपनी योजनाओं और बंगाली अस्मिता के कार्ड के सहारे पलटवार कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शाह के इन हमलों का मुकाबला करने के लिए ममता बनर्जी कौन सी नई रणनीति अपनाती हैं।



