NewbornCare – मानसून में नवजात की देखभाल के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
NewbornCare- बारिश का मौसम जहां मौसम को सुहाना बना देता है, वहीं इस दौरान बैक्टीरिया, वायरस और अन्य संक्रमण तेजी से फैलने का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में नवजात शिशुओं की देखभाल को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि जीवन के शुरुआती महीनों में उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि सही देखभाल और स्वच्छता अपनाकर मानसून में होने वाली कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बच्चों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

स्तनपान को दें प्राथमिकता
डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक शिशु के लिए मां का दूध सबसे उपयुक्त आहार माना जाता है। मानसून में संक्रमण का खतरा बढ़ने पर स्तनपान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीबॉडी बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। इससे कई सामान्य संक्रमणों से बचाव में भी सहायता मिल सकती है।
स्वच्छता बनाए रखना है जरूरी
बारिश के मौसम में नमी के कारण कीटाणु तेजी से पनप सकते हैं। ऐसे में बच्चे को गोद लेने, दूध पिलाने या उसकी देखभाल करने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके अलावा शिशु के कपड़े, बिस्तर, खिलौने और आसपास का वातावरण भी नियमित रूप से साफ रखना जरूरी है, ताकि संक्रमण का जोखिम कम हो सके।
सूती और पूरी तरह सूखे कपड़े पहनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात की त्वचा बेहद नाजुक होती है और नमी के संपर्क में आने पर रैशेज या फंगल संक्रमण की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए बच्चे को हमेशा साफ, मुलायम और सूती कपड़े पहनाने चाहिए। यदि कपड़े या डायपर गीले हो जाएं तो उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए और दोबारा इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह सुखाना चाहिए।
कमरे का तापमान रखें संतुलित
मानसून के दौरान कभी ठंडक तो कभी उमस का माहौल बन जाता है। ऐसे में बच्चे को बहुत अधिक ठंडे या अत्यधिक गर्म वातावरण में रखने से बचना चाहिए। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन होना चाहिए। यदि Air Conditioner या Cooler का उपयोग किया जा रहा हो तो तापमान सामान्य रखें और बच्चे को सीधे ठंडी हवा के संपर्क में न आने दें।
मच्छरों और नमी से करें बचाव
बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञ नवजात को मच्छरदानी में सुलाने और घर के आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह देते हैं। साथ ही डायपर समय-समय पर बदलना और नहाने के बाद शरीर, विशेषकर त्वचा की सिलवटों को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है, ताकि त्वचा संबंधी समस्याओं से बचा जा सके।
सुरक्षित पानी और सीमित संपर्क पर दें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में पानी दूषित होने की संभावना अधिक रहती है। छह महीने से कम उम्र के शिशुओं को सामान्यतः अलग से पानी देने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि किसी विशेष परिस्थिति में पानी देना हो तो पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। इसके अलावा यदि परिवार का कोई सदस्य सर्दी, खांसी या वायरल संक्रमण से पीड़ित हो, तो उसे नवजात के सीधे संपर्क से बचाना चाहिए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सकता है।