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EarCleaning – कॉटन ईयरबड्स से कान साफ करना कितना सुरक्षित, विशेषज्ञों की सलाह

EarCleaning –  हममें से ज्यादातर लोग रोजमर्रा की साफ-सफाई के हिस्से के रूप में कानों की सफाई भी करते हैं। अक्सर इसके लिए कॉटन वाले ईयरबड्स या कॉटन प्लग का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह तरीका आसान और तुरंत प्रभावी लगता है। कई घरों में यह आदत इतनी आम हो चुकी है कि लोग इसे सामान्य देखभाल का हिस्सा मानते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कान की सफाई के लिए इस तरह की चीजों का इस्तेमाल हमेशा सुरक्षित नहीं होता। कई बार यह आदत फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकती है। इसी वजह से डॉक्टर बार-बार यह सलाह देते हैं कि कान की संरचना और उसकी प्राकृतिक प्रक्रिया को समझना जरूरी है, ताकि अनजाने में किसी तरह की परेशानी न हो।

कान खुद को साफ रखने में सक्षम होते हैं

चिकित्सकों के अनुसार हमारे शरीर की तरह कान भी अपनी सफाई का एक प्राकृतिक तरीका रखते हैं। कान के अंदर बनने वाला ईयरवैक्स कई लोगों को गंदगी जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह कानों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मोम जैसा पदार्थ धूल, छोटे कण और बैक्टीरिया को कान के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचने से रोकने में मदद करता है।

ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में यह वैक्स धीरे-धीरे खुद ही बाहर की ओर आ जाता है। इसलिए हर बार इसे निकालने की आवश्यकता नहीं होती। कई लोग जब कॉटन प्लग से इसे हटाने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर यह बाहर निकलने के बजाय और अंदर की तरफ धकेला जा सकता है। इससे कान के भीतर जमा होने की समस्या भी पैदा हो सकती है।

कॉटन ईयरबड्स से सफाई क्यों हो सकती है नुकसानदायक

दिल्ली में आयोजित एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कमलेश अवस्थी ने बताया कि कॉटन प्लग का इस्तेमाल करते समय लोग अक्सर यह समझते हैं कि वे कान से वैक्स निकाल रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में कई बार यह वैक्स को और गहराई में पहुंचा देता है। जब ऐसा बार-बार होता है तो कान के भीतर वैक्स की परत मोटी हो सकती है।

ऐसी स्थिति में कान बंद-बंद महसूस होना, सुनने में कमी आना या भारीपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में यह ब्लॉकेज इतना बढ़ सकता है कि डॉक्टर की मदद से ही इसे साफ करना पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कान के अंदर किसी भी वस्तु को डालना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि यह हिस्सा बेहद संवेदनशील होता है।

बार-बार इस्तेमाल से बढ़ सकता है ब्लॉकेज का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से कॉटन ईयरबड्स से कान साफ करता है, तो वैक्स जमा होने की समस्या बढ़ सकती है। कई बार लोग यह समझते हैं कि कान में ज्यादा गंदगी बन रही है, जबकि वास्तव में वैक्स को अंदर धकेलने के कारण ही यह समस्या बढ़ती है।

जब वैक्स कान के अंदर इकट्ठा हो जाता है, तो इससे सुनने में परेशानी, कान में दबाव महसूस होना या हल्की-हल्की आवाजें सुनाई देने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा असहज हो सकती है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि बिना जरूरत कान के अंदर किसी भी तरह की वस्तु डालने से बचना चाहिए।

कान के अंदरूनी हिस्से को चोट पहुंचने का जोखिम

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कान की भीतरी त्वचा बहुत पतली और नाजुक होती है। ऐसे में कॉटन प्लग या किसी भी नुकीली वस्तु को अंदर डालते समय हल्की-सी गलती भी चोट का कारण बन सकती है। कभी-कभी इससे अंदर खरोंच या कट लग जाता है, जो बाद में संक्रमण की वजह बन सकता है।

डॉ. कमलेश अवस्थी के अनुसार कान सिर्फ सुनने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कान के अंदर किसी तरह की चोट या सूजन हो जाए तो कुछ लोगों को चक्कर आने या संतुलन से जुड़ी दिक्कतें भी महसूस हो सकती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ घर पर खुद से कान की गहराई में सफाई करने से बचने की सलाह देते हैं।

सुरक्षित देखभाल के लिए क्या रखें ध्यान

डॉक्टरों का मानना है कि कानों की सफाई के लिए सामान्य तौर पर बाहरी हिस्से को हल्के कपड़े या साफ तौलिये से पोंछना ही पर्याप्त होता है। यदि किसी व्यक्ति को कान में अत्यधिक वैक्स, दर्द, खुजली या सुनने में कमी जैसी समस्या महसूस हो रही हो तो बेहतर है कि वह ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवाए।

विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत पड़ने पर डॉक्टर विशेष उपकरणों की मदद से सुरक्षित तरीके से कान की सफाई करते हैं। इससे कान के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा कम रहता है। सही जानकारी और सावधानी के साथ कानों की देखभाल करना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

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