GreenCorridor – बैकुंठधाम से ला मार्टिनियर फ्लाईओवर को मिली मंजूरी, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
GreenCorridor – लखनऊ में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर योजना के तीसरे चरण को अहम मंजूरी मिल गई है। गोमती नगर स्थित बैकुंठधाम से ला मार्टिनियर तक बनने वाले फ्लाईओवर के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। स्मारकों और पार्कों के संरक्षण के लिए गठित प्रबंध समिति ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी है। दरअसल, फ्लाईओवर का प्रस्तावित मार्ग 1090 चौराहे के पास स्थित गोमती पार्क के निकट से गुजरता है, इसलिए निर्माण शुरू करने से पहले समिति की अनापत्ति आवश्यक थी।

शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फ्लाईओवर बनने से 1090 चौराहे और समतामूलक चौक जैसे व्यस्त इलाकों में लगने वाले जाम से काफी राहत मिलेगी।
फ्लाईओवर बनने से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात को सुचारु बनाना है। बैकुंठधाम से ला मार्टिनियर तक प्रस्तावित फ्लाईओवर इसी योजना का हिस्सा है। इसके निर्माण के बाद आईआईएम रोड से गोमती नगर की ओर आने-जाने वाले वाहनों को तेज और आसान मार्ग मिलेगा।
वर्तमान में 1090 चौराहा और समतामूलक चौक शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में गिने जाते हैं। यहां दिन के कई समय यातायात का दबाव इतना अधिक होता है कि लोगों को लंबी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ता है। फ्लाईओवर बनने के बाद इन क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे शहर के कई प्रमुख मार्गों के बीच आवागमन का समय भी घटेगा और यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
परियोजना की लागत और निर्माण अवधि
ग्रीन कॉरिडोर योजना के परियोजना प्रबंधक ए.के. सेंगर के अनुसार प्रस्तावित फ्लाईओवर की कुल लंबाई लगभग 2.02 किलोमीटर होगी। इसे चार लेन के रूप में तैयार किया जाएगा ताकि अधिक संख्या में वाहन आसानी से गुजर सकें।
इस परियोजना पर लगभग 570 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए दो वर्ष की समय सीमा तय की गई है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना की निविदा प्रक्रिया अगले तीन महीनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्लाईओवर का मार्ग 1090 चौराहे के ऊपर से नहीं बल्कि उसके पास से गुजरेगा, जिससे चौराहे की मौजूदा संरचना पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एनओसी मिलने के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए स्मारकों और पार्कों की देखरेख करने वाली प्रबंध समिति की अनुमति जरूरी थी। प्रस्तावित मार्ग में डॉ. भीमराव अंबेडकर गोमती पार्क और गोमती विहार के कुछ हिस्से आते हैं, जहां फ्लाईओवर के पिलर बनाने का प्रस्ताव है।
इसी कारण निर्माण शुरू करने से पहले समिति की स्वीकृति ली गई। प्रमुख सचिव आवास की अध्यक्षता में फरवरी में आयोजित बैठक में लखनऊ विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता ने परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। बैठक में इस योजना को जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य मानते हुए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई।
हालांकि समिति ने निर्माण कार्य के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं ताकि पार्कों और स्मारकों की संरचना सुरक्षित बनी रहे।
शर्तों के साथ दी गई अनुमति
प्रबंध समिति ने स्पष्ट किया है कि फ्लाईओवर निर्माण के दौरान पार्कों में स्थापित मूर्तियों और अन्य संरचनाओं को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही हरियाली और पार्कों की देखभाल की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी को उठानी होगी।
लखनऊ विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया गया है कि यदि निर्माण के दौरान हरियाली या अन्य संरचनाओं को कोई क्षति होती है तो उसे अपने खर्च पर ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में फ्लाईओवर का निर्माण होगा, वहां जमीन के स्वामित्व या पार्कों के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि इन शर्तों के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने से शहर में ट्रैफिक की समस्या कम होगी और साथ ही पार्कों और स्मारकों की संरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।