झारखण्ड

SocialSecurity – चार महीने से अटकी पेंशन, 11 लाख प्रभावित

SocialSecurity – झारखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की रकम पिछले चार महीनों से जारी नहीं हो पाने के कारण लाखों जरूरतमंद परिवारों की चिंता बढ़ गई है। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के तहत हर लाभार्थी को प्रतिमाह 1000 रुपये मिलते हैं, लेकिन समय पर भुगतान न होने से करीब 11 लाख लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। कई बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह राशि दवा, राशन और छोटे-मोटे घरेलू खर्च का मुख्य सहारा होती है। भुगतान में आई इस देरी ने गांवों और कस्बों तक असर डाला है।

लाभार्थियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव

राज्य के विभिन्न जिलों से मिल रही जानकारी के अनुसार पेंशन नहीं मिलने से बुजुर्गों को उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर दिव्यांग लाभार्थियों ने भी सहायता राशि न मिलने की बात कही है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य कमजोर वर्गों को न्यूनतम आर्थिक सहारा देना है, लेकिन लगातार चार माह तक राशि लंबित रहने से योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन अक्सर नकद जरूरतों को पूरा करने का एकमात्र साधन होती है। ऐसे में भुगतान में विलंब का सीधा असर जीवन स्तर पर दिखाई दे रहा है।

मंईयां सम्मान योजना की किस्त भी लंबित

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता राशि भी कई महीनों से जारी नहीं होने की बात सामने आई है। इस योजना से जुड़ी महिलाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि नियमित भुगतान से घरेलू खर्च में मदद मिलती थी, लेकिन देरी के कारण बजट बिगड़ गया है।

सरकारी स्तर पर इस संबंध में स्पष्ट समयसीमा की घोषणा अभी तक नहीं की गई है, जिससे लाभार्थियों की चिंता बनी हुई है।

देरी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

पेंशन भुगतान में आई रुकावट को लेकर राज्य में सियासी बहस भी तेज हो गई है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने देरी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि राज्य के हिस्से की लगभग 1.36 हजार करोड़ रुपये की राशि बकाया है और विकास मद में भी कटौती की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है।

वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने राज्य सरकार पर ही सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर नहीं भेजे जाने के कारण केंद्र से अगली किस्त जारी नहीं हो सकी। उनका कहना है कि बिना आवश्यक दस्तावेज और लेखा-जोखा के भुगतान संभव नहीं है।

भुगतान प्रक्रिया में आई रुकावट

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से अक्टूबर तक की किस्त जारी की जा चुकी थी। इसके बाद सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने करीब दो महीने पहले उपयोगिता प्रमाण-पत्र भेजा, लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण अगली राशि अटक गई।

राज्य सरकार ने ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए 100 करोड़ रुपये का कॉरपस फंड बनाया था। बताया जा रहा है कि उस राशि का उपयोग पहले ही किया जा चुका है। अब राज्य सरकार को केंद्र से धनराशि जारी होने का इंतजार है।

मार्च तक राहत की उम्मीद

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि मार्च तक राशि प्राप्त हो जाती है तो बकाया पेंशन एकमुश्त जारी की जा सकती है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।

लाभार्थी फिलहाल नियमित भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया को तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि पात्र लोगों को जल्द राहत मिल सके।

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