Ranchi News: नए यूजीसी कानून के खिलाफ रांची में छात्रों का हल्लाबोल, विश्वविद्यालय परिसर में फूंकी प्रतियां
Ranchi News: केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किए गए नए यूजीसी कानून के विरोध में छात्र संगठनों का गुस्सा उबलने लगा है। झारखंड की राजधानी रांची में इस कानून के खिलाफ विरोध की लहर तेज हो गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के परिसर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि यह कानून देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को प्रभावित करेगा और इससे विद्यार्थियों के बीच एक नई तरह की खाई पैदा होगी।

परिसर में विरोध प्रदर्शन और कानून की प्रतियां जलाईं
मंगलवार को विश्वविद्यालय का माहौल उस समय गरमा गया जब आक्रोशित छात्रों ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में तख्तियां लेकर परिसर में घूमे और प्रशासनिक भवन के पास विरोध सभा की। विरोध दर्ज कराने के लिए छात्रों ने सार्वजनिक रूप से यूजीसी कानून की प्रतियों को आग के हवाले कर दिया। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से मौके पर सतर्कता बरती गई, जिससे विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। छात्रों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
शिक्षा में भेदभाव और असमानता बढ़ने का अंदेशा
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्रों ने नए कानून की बारीकियों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन करार दिया। प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम कुमार और विष्णु कुमार राम ने बताया कि इस कानून के प्रावधानों से भविष्य में स्कूल और कॉलेजों के भीतर छात्र समुदायों के बीच भेदभाव बढ़ेगा। उनका तर्क है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में ऐसे बदलाव नहीं होने चाहिए जो समाज को एकजुट करने के बजाय विभाजित करें। छात्रों का आरोप है कि सरकार शिक्षा के व्यवसायीकरण और कुछ वर्गों को लाभ पहुंचाने की नीयत से ऐसे कानून थोप रही है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय मेधावी छात्र हाशिए पर चले जाएंगे।
मेधावी छात्रों के भविष्य और सामाजिक सौहार्द पर चिंता
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। छात्रों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में पहले से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है और मेधावी छात्र अच्छे अंक लाने के बावजूद संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में नया यूजीसी कानून उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देगा। छात्रों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि चुनावों के समय एकता और भाईचारे की बात की जाती है, लेकिन नीति निर्धारण के समय ऐसे कदम उठाए जाते हैं जिससे समाज में वैमनस्य पैदा हो। उनका मानना है कि इस कानून के लागू होने से शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के बीच आपसी टकराव की स्थिति बन सकती है, जो शिक्षण कार्य के लिए उचित नहीं है।
सरकार को सख्त चेतावनी और आंदोलन विस्तार की रणनीति
अक्षय कुमार पांडेय और राहुल कुमार सहित अन्य छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस विवादित कानून की समीक्षा की जाए और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया, तो आने वाले दिनों में रांची की सड़कों पर बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। छात्र संगठनों ने अब अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर राज्यव्यापी हड़ताल और तालाबंदी की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



