झारखण्ड

Railway quarters: रेलवे और जिला परिषद के बीच भूमि विवाद पूजा टॉकीज क्षेत्र में बढ़ती तनातनी

Railway quarters: पूजा टॉकीज के पास स्थित लगभग 20 डिसमिल भूमि को लेकर जिला परिषद और रेलवे प्रशासन के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। हाल ही में जिला परिषद  District Council द्वारा इस भूमि पर करीब चार लाख रुपये की लागत से बाउंडरी निर्माण कराया गया था। निर्माण के तुरंत बाद बाउंडरी पर जिला परिषद का नाम भी अंकित कराया गया, ताकि स्वामित्व स्पष्ट रहे। हालांकि, अगले ही दिन सुबह नाम पूरी तरह मिटा मिलने से मामला अचानक गर्मा गया और दोनों विभागों के बीच तनाव और बढ़ गया।

Railway quarters
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बाउंडरी पर लिखे नाम को मिटाने से विवाद तेज

जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, According to eyewitnesses एक रेलकर्मी को बाउंडरी के अंदर पेंट करते हुए देखा गया था। आरोप है कि इसी दौरान जिला परिषद का नाम मिटा दिया गया, जिसे परिसंपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हस्तक्षेप की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जिला परिषद प्रशासन इस कृत्य को न केवल सरकारी कार्य में बाधा बल्कि स्वामित्व को चुनौती देने वाला कदम मान रहा है।

जिला परिषद की भूमि होने का दावा

जिला परिषद अध्यक्ष का कहना है कि यह भूमि जिला परिषद Land District Council की वैध संपत्ति है और इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता में है। इस क्षेत्र में रेलवे के कुछ क्वार्टर भी मौजूद हैं, जिसके कारण स्वामित्व को लेकर मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। मामले की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंचलाधिकारी को भूमि की मापी कराने हेतु पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि वास्तविक सीमांकन स्पष्ट हो सके।

सरकारी संपत्ति से छेड़छाड़ पर कठोर कार्रवाई के संकेत

शारदा सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति Government property से छेड़छाड़ एक गंभीर अपराध है और इसे किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बाउंडरी पर लिखा जिला परिषद का नाम मिटाना न केवल स्वामित्व को कमजोर करने का प्रयास है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी चुनौती देता है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, साथ ही संबंधित रेलकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

विवाद का संभावित प्रभाव

इस प्रकरण ने दोनों विभागों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा कर दिया है। यदि भूमि का स्पष्ट सीमांकन Clear demarcation of the land जल्द नहीं होता, तो आने वाले समय में यह विवाद प्रशासनिक स्तर पर और बड़े टकराव का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि यह क्षेत्र आवासीय और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

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