झारखण्ड

Digital Education – ग्रामीण स्कूलों में संसाधनों की कमी से अधूरा है स्मार्ट क्लास का सपना

Digital Education – केंद्र और राज्य सरकारें विद्यालयों में तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लास और ICT Lab जैसी सुविधाओं का विस्तार कर रही हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक शिक्षण पद्धति से जोड़ना और उन्हें डिजिटल दौर की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। हालांकि, कई ग्रामीण सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। बिजली और इंटरनेट जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी न होने से अनेक स्थानों पर डिजिटल शिक्षा का संचालन प्रभावित हो रहा है।

खूंटी के मुरहू प्रखंड की तस्वीर

झारखंड के खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में कई सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT Lab स्थापित किए गए हैं, लेकिन उनका नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्थानीय स्तर पर बिजली की अनियमित आपूर्ति और कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके कारण शिक्षक डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कराने के बजाय पारंपरिक शिक्षण पद्धति का सहारा लेने को मजबूर हैं। कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी तकनीक आधारित शिक्षा के प्रभावी संचालन में बाधा बन रही है।

शिक्षकों ने बताई बुनियादी जरूरतें

एक शिक्षक ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि डिजिटल शिक्षा की पहल सकारात्मक है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक संसाधनों का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि विद्यालयों में निर्बाध बिजली, बेहतर इंटरनेट सेवा और डिजिटल उपकरणों के रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं होगी, तो स्मार्ट क्लास की उपयोगिता सीमित रह जाएगी। उन्होंने पहले आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने रखी अपनी बात

मुरहू प्रखंड के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने भी माना कि केवल तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने से डिजिटल शिक्षा का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार प्रखंड में ICT के माध्यम से लगभग 12 से 13 स्मार्ट क्लास संचालित हैं, लेकिन बिजली और इंटरनेट की समस्याओं के कारण उनका नियमित संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में बुनियादी विद्यालयों की संख्या भी सीमित है, जिससे संसाधनों का प्रभावी उपयोग चुनौती बना हुआ है।

छोटे विद्यालयों के युक्तिकरण का सुझाव

स्थानीय जानकारी के अनुसार मुरहू प्रखंड में कुल 157 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 134 सरकारी और 26 अनुदानित स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा एक स्वयंसेवी संस्था भी लगभग 30 विद्यालयों का संचालन कर रही है। कई ऐसे स्कूल हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 10 से 12 के बीच है। अरुण कुमार साबू का सुझाव है कि ऐसे विद्यालयों का युक्तिकरण कर छात्रों को बेहतर संसाधनों वाले स्कूलों में स्थानांतरित किया जाए। उनका मानना है कि इससे स्मार्ट क्लास, ICT Lab और अन्य आधुनिक सुविधाओं का अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा को सफल बनाने के लिए तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ मजबूत आधारभूत संरचना विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।

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