ACB Raid Koderma 2026: कोडरमा के शोरूम से खुलेगा अरबों के घोटाले का राज, नप गए बड़े-बड़े अधिकारी
ACB Raid Koderma 2026: झारखंड के कोडरमा जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक बड़ी दबिश दी है। बीती रात झुमरीतिलैया बाईपास पर स्थित सीएम टॉवर के ग्राउंड फ्लोर पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एसीबी की टीम ने टाटा मोटर्स मोटोजेन शोरूम पर अचानक (Anti Corruption Investigation) शुरू कर दी। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में मिले पुख्ता इनपुट के आधार पर की गई है। आधी रात को शुरू हुई इस छापेमारी ने जिले के रसूखदारों और सफेदपोशों के बीच खलबली पैदा कर दी है, क्योंकि इस कार्रवाई के तार राज्य के कई बड़े चेहरों से जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है।

घंटों चली फाइलों की पड़ताल और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी
एसीबी के अधिकारियों ने शोरूम के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली और वहां मौजूद वित्तीय रिकॉर्ड्स को अपने कब्जे में ले लिया है। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने कई घंटों तक शोरूम में मौजूद (Financial Document Seizure) की प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिसमें लेन-देन से जुड़े ऐसे कागजात मिले हैं जो आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक की संपत्ति की ओर इशारा करते हैं। टीम ने न केवल कागजी दस्तावेजों को खंगाला, बल्कि शोरूम के केबिनों और अलमारियों में छिपाई गई डायरियों की भी जांच की, जिनमें संदिग्ध निवेश और कमीशनखोरी के संकेत मिलने की बात कही जा रही है।
डिजिटल सबूतों के लिए हार्ड डिस्क और कंप्यूटर कब्जे में
आज के दौर में भ्रष्टाचार के सबूत कागजों से ज्यादा डिजिटल उपकरणों में छिपे होते हैं, जिसे देखते हुए एसीबी ने तकनीक का सहारा लिया है। शोरूम में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य (Electronic Evidence Collection) से जुड़े उपकरणों को जांच टीम ने जब्त कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि इन हार्ड ड्राइव्स में कई ऐसे डिलीट किए गए डेटा हो सकते हैं, जो अवैध धन के प्रवाह और बेनामी संपत्तियों के बारे में बड़ी जानकारी दे सकते हैं। इन उपकरणों को अब फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है ताकि इनके भीतर छिपे सच को बाहर निकाला जा सके।
साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए टाटा मोटर्स शोरूम को किया गया सील
एसीबी की इस कार्रवाई के बाद शोरूम मालिक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि जांच पूरी होने तक व्यवसाय पर ब्रेक लग गया है। जांच टीम ने साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की संभावित छेड़छाड़ को रोकने के लिए शोरूम को पूरी तरह (Premises Sealed) करने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने बताया कि शोरूम मालिक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला काफी समय से रडार पर था। शोरूम के सील होने से न केवल व्यापारिक गतिविधियां ठप हुई हैं, बल्कि कोडरमा के व्यापारिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि इस कार्रवाई की आंच अब और भी कई लोगों तक पहुँच सकती है।
चर्चित शराब घोटाले और निलंबित आईएएस विनय चौबे से जुड़ा कनेक्शन
इस छापेमारी की सबसे सनसनीखेज कड़ी यह है कि इसके तार राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ते दिख रहे हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो (Alcohol Scam Link) के तहत जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे और शोरूम संचालक के बीच गहरे आर्थिक संबंधों के प्रमाण मिले हैं। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि घोटाले से प्राप्त काली कमाई को शोरूम के माध्यम से सफेद करने या विभिन्न संपत्तियों में निवेश करने का खेल चल रहा था। एसीबी अब इस दिशा में कड़ियां जोड़ रही है कि आखिर किस तरह सरकारी पदों का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति का यह विशाल साम्राज्य खड़ा किया गया।
निदेशक स्मृधा सिंह के अन्य ठिकानों पर भी एक साथ छापेमारी
जांच का दायरा केवल एक शोरूम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एसीबी ने इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चौतरफा हमला किया है। टाटा मोटर्स मोटोजेन शोरूम के निदेशक स्मृधा सिंह से संबंधित अन्य (Multiple Raid Locations) पर भी एक साथ छापेमारी की गई है। यह माना जा रहा है कि स्मृधा सिंह के अन्य निवेशों और व्यावसायिक उपक्रमों में भी अवैध धन का बड़ा हिस्सा लगा हुआ है। एक साथ कई ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आरोपियों को साक्ष्य छिपाने या आपस में संपर्क करने का कोई भी मौका न मिल सके।
फॉरेंसिक जांच और कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटी टीम
जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अब वैज्ञानिक कसौटी पर परखा जाएगा। एसीबी के आला अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से (Evidence Authentication) की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यदि जब्त किए गए डेटा और कागजातों से आय से अधिक संपत्ति की पुष्टि होती है, तो शोरूम संचालक और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। ब्यूरो इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी के बजाय पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत में अपनी केस फाइल मजबूत करना चाहता है ताकि भ्रष्टाचार के इस बड़े सिंडिकेट को सजा मिल सके।
कोडरमा के प्रशासनिक और व्यापारिक हलकों में मचा हड़कंप
एसीबी की इस धमक ने कोडरमा ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है। जिस तरह से एक शोरूम के माध्यम से (Wealth Disproportionate Case) की परतों को खोला जा रहा है, उससे कई अन्य प्रभावशाली लोग भी जांच के दायरे में आने की आशंका जता रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि शराब घोटाले और काली कमाई के इस गठजोड़ में और कौन-कौन से बड़े नाम उजागर होंगे। एसीबी की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति कानून की पहुंच से बाहर नहीं रहेगा।



