SMASHMissile – रियाद रक्षा प्रदर्शनी में पाकिस्तान ने दिखाई नई क्षमता
SMASHMissile – पाकिस्तान ने रियाद में आयोजित विश्व रक्षा प्रदर्शनी 2026 के दौरान अपनी नई हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल SMASH को सार्वजनिक रूप से पेश किया है। इस प्रस्तुति के साथ ही पाकिस्तान ने अपनी समुद्री और सामरिक क्षमताओं में संभावित बढ़ोतरी का संकेत दिया है। यह मिसाइल ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस की ओर से प्रदर्शित की गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसे दोहरी भूमिका वाले हथियार के रूप में विकसित किया गया है, जो समुद्र और जमीन दोनों तरह के लक्ष्यों को साधने में सक्षम है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रणालियां क्षेत्रीय सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, हालांकि इसकी वास्तविक प्रभावशीलता परीक्षण और तैनाती के बाद ही स्पष्ट होगी।
मारक क्षमता और तकनीकी विशेषताएं
SMASH को P-282 पदनाम के तहत जहाज से दागी जाने वाली एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आधिकारिक दावों के मुताबिक इसकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर है। यह अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ अपनाते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है और अंतिम चरण में ऊर्ध्वाधर कोण से हमला करती है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार की उड़ान प्रोफाइल दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को प्रतिक्रिया के लिए सीमित समय देती है। हालांकि ऐसे दावों की पुष्टि स्वतंत्र परीक्षणों के बाद ही की जा सकती है। मिसाइल को समुद्री फ्रिगेट जैसे जुल्फिकार और तुगरिल श्रेणी के जहाजों से लॉन्च करने की क्षमता बताई गई है। इसके अलावा इसे मोबाइल ग्राउंड प्लेटफॉर्म से भी दागा जा सकता है।
प्रदर्शनी के बाद परीक्षण की जानकारी
रियाद में प्रदर्शनी के दौरान इसे सार्वजनिक रूप से दिखाने के बाद इसके परीक्षण की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि परीक्षण के परिणामों और विस्तृत तकनीकी आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। रक्षा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मिसाइल को क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
पाकिस्तान की ओर से इसे अपनी रक्षा आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा बताया गया है। बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने नौसैनिक क्षमताओं के विस्तार पर जोर दिया है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए।
सैटेलाइट लॉन्च से जुड़ी पहल
इसी क्रम में पाकिस्तान ने हाल ही में सात उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की भी घोषणा की है। इनमें EO-2 नामक एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह भी शामिल है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इन उपग्रहों का उद्देश्य निगरानी, संसाधन प्रबंधन और तकनीकी अनुसंधान को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपग्रहों का उपयोग नागरिक और रक्षा दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। हालांकि किसी भी देश द्वारा अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर सतर्कता बनी रहती है। दक्षिण एशिया में अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेज हुआ है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर संभावित असर
दक्षिण एशिया में रक्षा क्षमताओं का विस्तार हमेशा से रणनीतिक चर्चा का विषय रहा है। नई मिसाइल प्रणालियों और उपग्रह प्रक्षेपणों को पड़ोसी देश भी ध्यान से देखते हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर पाकिस्तान ने इसे अपनी सुरक्षा जरूरतों से जुड़ा कदम बताया है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी प्रगति और सैन्य आधुनिकीकरण के साथ-साथ पारदर्शिता और संवाद भी उतने ही जरूरी हैं। क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी भरोसा और कूटनीतिक संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



