NorthKoreaThreat – किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया को दी कड़ी चेतावनी
NorthKoreaThreat – उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर दक्षिण कोरिया के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि उनके देश की सुरक्षा को किसी भी तरह का खतरा हुआ तो प्योंगयांग कठोरतम कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सियोल के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता की संभावना को फिलहाल खारिज कर दिया, हालांकि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं।

पार्टी बैठक में सुरक्षा और नीति पर जोर
सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की बैठक के समापन सत्र में किम जोंग उन ने आगामी पांच वर्षों की नीतिगत दिशा को सामने रखा। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई। उन्होंने संकेत दिया कि देश की रक्षा नीति अब और अधिक आक्रामक तथा आत्मनिर्भर ढांचे की ओर बढ़ेगी।
बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों के सामने किम ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उत्तर कोरिया को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण को राष्ट्रीय अस्तित्व से जोड़ते हुए इसे दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बताया।
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर विशेष फोकस
आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, किम ने नई हथियार प्रणालियों के विकास पर बल दिया है। उनका कहना है कि हाल के वर्षों में परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में हुई प्रगति ने उत्तर कोरिया को एक सशक्त परमाणु राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि देश की रक्षा क्षमता किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए पर्याप्त है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान उत्तर कोरिया की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं, ताकि क्षेत्रीय समीकरणों में उसकी भूमिका प्रभावशाली बनी रहे।
अमेरिका के साथ बातचीत पर शर्त
हालांकि दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत से उन्होंने इनकार किया, लेकिन अमेरिका के संदर्भ में किम का रुख कुछ अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि यदि वॉशिंगटन वास्तव में संवाद बहाल करना चाहता है तो उसे उत्तर कोरिया के प्रति अपनी तथाकथित शत्रुतापूर्ण नीतियों को समाप्त करना होगा।
2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई वार्ता के विफल होने के बाद से दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत ठप पड़ी है। तब से कई प्रयासों के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
सियोल की प्रतिक्रिया संयमित
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने उत्तर कोरिया के हालिया बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। मंत्रालय ने कहा कि अंतर-कोरियाई संबंधों को स्थायी शत्रुता के रूप में परिभाषित करना स्थिति को और जटिल बना सकता है।
सियोल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शांति और स्थिरता के प्रयासों को धैर्यपूर्वक जारी रखेगा। दक्षिण कोरिया का मानना है कि संवाद ही दीर्घकालिक समाधान का एकमात्र रास्ता है, भले ही वर्तमान माहौल चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।
विशेषज्ञों की नजर में व्यापक रणनीति
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि किम जोंग उन की तीखी बयानबाजी का मतलब तात्कालिक सैन्य संघर्ष नहीं है। विशेषज्ञ इसे एक व्यापक रणनीति का हिस्सा मानते हैं, जिसके जरिए उत्तर कोरिया अपनी परमाणु क्षमता और रूस तथा चीन के साथ संबंधों का उपयोग कर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
किम ने 2024 में दक्षिण कोरिया को स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था। ऐसे में हालिया बयान उसी नीति की निरंतरता माने जा रहे हैं।
नेतृत्व पद पर दोबारा चयन
हाल ही में किम जोंग उन को वर्कर्स पार्टी के शीर्ष पद पर फिर से चुना गया है। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, हजारों प्रतिनिधियों की सर्वसम्मति से उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया। यह चुनाव पांच वर्षीय कांग्रेस प्रक्रिया का हिस्सा है, जो 2016 से नियमित अंतराल पर आयोजित होती है।
उनका दोबारा चयन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि देश की नीतियों में किसी बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम है।



