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Israel-Iran War Threat 2025: क्या फिर से दहक उठेगी पश्चिम एशिया की आग? ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात पर दुनिया की नजर

Israel-Iran War Threat 2025: मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। इजरायली खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट्स ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि ईरान अपने उन परमाणु ठिकानों और मिसाइल प्रोग्राम को फिर से सक्रिय कर रहा है, जिन्हें जून 2025 में हुए इजरायली हमलों में भारी नुकसान पहुँचा था। इजरायल का मानना है कि ईरान केवल अपनी क्षमताएं नहीं बढ़ा रहा, बल्कि वह एक बड़े और घातक ‘सरप्राइज अटैक’ की फिराक में भी है। इस खबर ने इजरायल के रक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिससे सैन्य जवाबी कार्रवाई (Military Strike) की संभावना बढ़ गई है।

Israel-Iran War Threat 2025
Israel-Iran War Threat 2025

13 जून का वो युद्ध और परमाणु ठिकानों की तबाही

यह समझना जरूरी है कि वर्तमान तनाव की जड़ें जून 2025 के उस 12 दिवसीय भीषण युद्ध में छिपी हैं। इजरायल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत ईरान के नतांज और अन्य परमाणु केंद्रों पर भीषण बमबारी की थी। उस समय इजरायली और अमेरिकी हमलों ने ईरान के (Nuclear Enrichment Program) को लगभग जमींदोज कर दिया था। हालांकि, ताजा सैटेलाइट तस्वीरें और खुफिया इनपुट इशारा कर रहे हैं कि ईरान ने इन ठिकानों का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। इसके साथ ही वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन प्रति वर्ष 3,000 तक ले जाने की योजना बना रहा है, जो इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा है।

ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक: क्या बनेगी ईरान पर स्ट्राइक की योजना?

आने वाली 29 दिसंबर 2025 की तारीख कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित ‘मार-ए-लागो’ रिसॉर्ट में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति (Donald Trump) से मुलाकात करने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू इस बैठक में ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों का एक पूरा ‘ब्लूप्रिंट’ पेश करेंगे। इजरायल चाहता है कि इस बार ईरान के परमाणु और मिसाइल अभियान को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए अमेरिका सीधा सहयोग दे। ट्रंप प्रशासन का इस पर क्या रुख रहता है, इसी पर अगले साल के शांति या युद्ध का फैसला निर्भर करेगा।

ईरानी सैन्य अभ्यास या हमले की साजिश: इजरायल का डर

हाल ही में ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल अभ्यास शुरू किया है। ईरान इसे एक ‘नियमित सैन्य ड्रिल’ बता रहा है, लेकिन इजरायल इसे एक धोखे (Tactical Cover) के रूप में देख रहा है। इजरायली अधिकारियों का तर्क है कि 2023 में हमास के हमले के बाद उनकी ‘जोखिम सहने की क्षमता’ खत्म हो चुकी है। वे अब किसी भी गतिविधि को हल्के में नहीं लेना चाहते। इजरायल ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि इस अभ्यास की आड़ में ईरान मिसाइलें दागने की तैयारी कर सकता है। इजरायली खुफिया विभाग का मानना है कि हमले की आशंका 50 प्रतिशत से अधिक है।

अमेरिकी एजेंसियों की राय: क्या वास्तव में खतरा करीब है?

इजरायल के दावों के उलट, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का नजरिया थोड़ा अलग है। सीआईए और अन्य (US Intelligence) विभागों का कहना है कि उन्हें फिलहाल ईरान की तरफ से इजरायल पर किसी तत्काल हमले के ठोस संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि ईरान वर्तमान में अपनी खोई हुई सैन्य शक्ति को वापस पाने में लगा है, न कि किसी नए युद्ध को शुरू करने में। हालांकि, अमेरिका ने भी यह साफ किया है कि यदि ईरान ने अपनी सीमाएं लांघीं, तो परिणाम गंभीर होंगे। इजरायल और अमेरिका के बीच इस खुफिया आकलन में अंतर तनाव को और अधिक पेचीदा बना रहा है।

ईरान का पलटवार: ‘जो छेड़ेगा वो छोड़ा नहीं जाएगा’

तेहरान ने भी इजरायल और अमेरिका की इन योजनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके परमाणु ठिकानों या (Missile Facilities) पर फिर से हमला हुआ, तो वे ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III’ शुरू करेंगे। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी मिसाइलें इजरायल के हर बड़े शहर और तेल ठिकानों की जद में हैं। ईरान की इस आक्रामक मुद्रा ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि यदि इस बार संघर्ष शुरू हुआ, तो वह पहले से कहीं अधिक लंबा और विनाशकारी हो सकता है।

क्या दुनिया एक और बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का यह दौरा इजरायल की ‘डोमिनेंस’ की नीति का हिस्सा है। वे चाहते हैं कि अमेरिका के साथ मिलकर ईरान की कमर तोड़ दी जाए ताकि अगले कई दशकों तक कोई खतरा न रहे। लेकिन इस (Regional Stability) की कीमत बहुत भारी हो सकती है। चीन और रूस जैसी महाशक्तियां भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर बड़ा हमला करते हैं, तो पूरा मध्य पूर्व एक ऐसी आग में झुलस सकता है जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ेगा।

निष्कर्ष: निर्णायक मोड़ पर खड़ी है पश्चिम एशिया की कूटनीति

सर्दियों की ये सर्द रातें ईरान और इजरायल के बीच के तनाव से बेहद गर्म हो चुकी हैं। अब सबकी निगाहें डोनाल्ड ट्रंप के उस एक फैसले पर टिकी हैं, जो नेतन्याहू से मुलाकात के बाद लिया जाएगा। क्या अमेरिका एक और युद्ध में सीधे शामिल होगा या कूटनीति के जरिए (Conflict Resolution) का रास्ता तलाशा जाएगा? आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि दुनिया एक नए साल की शुरुआत शांति के साथ करेगी या फिर मिसाइलों के धमाकों के बीच।

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