IranWarPolicy – ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर उठे गंभीर सवाल
IranWarPolicy – पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव अब लगातार गहराता जा रहा है और यह संघर्ष दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है। हालात ऐसे संकेत दे रहे हैं कि स्थिति थमने के बजाय और जटिल होती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर चिंता जताते हुए कई अहम सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भले ही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई सामरिक स्तर पर प्रभावी दिखाई दे रही हो, लेकिन इस पूरे अभियान का स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य अब तक सामने नहीं आया है।

एक टेलीविजन चर्चा के दौरान सुलिवन ने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई की सफलता केवल युद्धक्षेत्र की उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि यह भी जरूरी होता है कि उसका अंतिम उद्देश्य स्पष्ट हो। उनके मुताबिक मौजूदा हालात में यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है कि इस संघर्ष के जरिए अमेरिका आखिर किस परिणाम तक पहुंचना चाहता है।
सैन्य सफलता के बावजूद लक्ष्य पर अस्पष्टता
सीएनएन के कार्यक्रम फरेद जकारिया जीपीएस में बातचीत के दौरान जैक सुलिवन ने अमेरिकी सेना की क्षमता और पेशेवर रवैये की सराहना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक बेहद कुशल, साहसी और अनुशासित हैं, लेकिन किसी भी युद्ध में सैनिकों की क्षमता के साथ-साथ स्पष्ट राजनीतिक और रणनीतिक दिशा भी उतनी ही जरूरी होती है।
सुलिवन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि युद्ध का अंतिम लक्ष्य स्पष्ट नहीं होगा तो संघर्ष लंबे समय तक भटक सकता है। उनके अनुसार अब तक इस सैन्य कार्रवाई में सात अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जो इस बात का संकेत है कि यह अभियान जोखिम से भरा हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से युद्ध को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग तर्क दिए गए हैं। कभी इसे सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया गया, तो कभी क्षेत्रीय स्थिरता का सवाल कहा गया। उनके मुताबिक ऐसी बदलती हुई दलीलें यह संकेत देती हैं कि रणनीति स्पष्ट नहीं है।
लंबे संघर्ष का खतरा और रणनीतिक चुनौती
सुलिवन का मानना है कि जब किसी युद्ध की शुरुआत के कई दिन बाद भी उसके उद्देश्य को लेकर भ्रम बना रहे, तो यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सैन्य अभियान अनिश्चित दिशा में आगे बढ़ सकता है।
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन संभवतः वेनेजुएला से जुड़े पिछले अनुभवों से गलत निष्कर्ष निकाल रहा है। उनके अनुसार किसी एक क्षेत्र में अपनाई गई रणनीति को दूसरे जटिल भू-राजनीतिक क्षेत्र में लागू करना हमेशा प्रभावी नहीं होता।
उन्होंने आगाह किया कि यदि यह संदेश जाता है कि अमेरिका बिना स्पष्ट योजना के कहीं भी सैन्य बल का प्रयोग कर सकता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर नई तरह की अस्थिरता पैदा हो सकती है।
भू-राजनीतिक समीकरणों पर संभावित असर
सुलिवन ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा यह युद्ध केवल क्षेत्रीय घटना नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हो सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से रूस की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस स्थिति से मॉस्को को रणनीतिक फायदा मिल सकता है।
उनके अनुसार रूस अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी जानकारी हासिल कर ईरान को सहयोग देने की कोशिश कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो इससे संघर्ष और जटिल हो सकता है तथा वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक मौजूदा हालात में कई बड़ी शक्तियां इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
यूक्रेन और एशिया पर पड़ने वाले प्रभाव
जैक सुलिवन ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। उनका मानना है कि इस संघर्ष में उलझने से यूक्रेन को मिलने वाला अमेरिकी समर्थन कमजोर हो सकता है।
इसके अलावा उन्होंने चीन का भी जिक्र किया। सुलिवन के मुताबिक बीजिंग इस पूरे घटनाक्रम को ध्यान से देख रहा होगा और इससे यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि बड़े देश अपने रणनीतिक हितों के लिए सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकते।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युद्ध बिना स्पष्ट रणनीति के जारी रहता है तो यह केवल अमेरिकी सैनिकों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी चुनौती बन सकता है। उनके अनुसार ऐसे हालात दुनिया के कई देशों को गलत संदेश दे सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई अस्थिरता को जन्म दे सकते हैं।



