GlobalConflict – काबुल अस्पताल पर हमले को लेकर यूरोपीय संघ की कड़ी प्रतिक्रिया
GlobalConflict – यूरोपीय संघ ने काबुल में एक बड़े चिकित्सा केंद्र पर हुए हवाई हमले को लेकर गहरी चिंता जताई है और इसे क्षेत्रीय तनाव में खतरनाक बढ़ोतरी बताया है। यह प्रतिक्रिया उस घटना के बाद आई है जिसमें पाकिस्तान की ओर से किए गए हमले में अफगानिस्तान की राजधानी के पुल-ए-चरखी इलाके स्थित एक प्रमुख नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया गया। इस घटना में भारी संख्या में लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर सामने आई है।

नागरिक ठिकानों पर हमले को लेकर सख्त चेतावनी
यूरोपीय संघ ने अपने आधिकारिक बयान में साफ कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों या चिकित्सा संस्थानों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। ऐसे स्थान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जेनेवा कन्वेंशन के तहत संरक्षित होते हैं। संघ ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य अभियानों में शामिल सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे इन नियमों का पालन करें। साथ ही, दोनों देशों से संयम बरतने और हालात को और बिगड़ने से रोकने की अपील की गई है।
तत्काल युद्धविराम और बातचीत की अपील
यूरोपीय संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान से तत्काल संघर्ष विराम लागू करने और कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि बढ़ता तनाव न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इस तरह की घटनाएं मानवीय संकट को और गहरा करती हैं, जिसका असर आम नागरिकों पर सबसे अधिक पड़ता है।
हमले में भारी जनहानि का दावा
अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्ताकी ने इस हमले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसमें 400 से अधिक मरीजों की मौत हुई है, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह हमला 16 मार्च की रात को किया गया, जब अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मृतकों की संख्या आगे और बढ़ सकती है।
ड्रोन और विमानों से हमले का आरोप
मुत्ताकी ने दावा किया कि यह हमला पाकिस्तानी सेना के विमानों और ड्रोन के जरिए किया गया और इसमें जानबूझकर कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती लोग नशे की लत से जूझ रहे थे और उनका इलाज अंतरराष्ट्रीय सहयोग से चल रहे कार्यक्रमों के तहत हो रहा था। ऐसे लोगों पर हमला करना न केवल अमानवीय है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी उल्लंघन है।
रमजान के दौरान हमले पर नाराजगी
अफगान पक्ष ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि यह हमला रमजान के अंतिम दिनों में किया गया, जब आमतौर पर शांति और संयम की उम्मीद की जाती है। उन्होंने इसे संवेदनशील समय में किया गया गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया। मुत्ताकी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न तो इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप है और न ही मानवीय मूल्यों के।
अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया और चेतावनी
अफगान सरकार का कहना है कि उसने इस हमले के जवाब में सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई की है। उनके अनुसार, केवल उन्हीं सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां से हमले किए गए थे। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर इस तरह की गतिविधियां जारी रहीं, तो जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी। उन्होंने पाकिस्तान से अपने कदमों पर पुनर्विचार करने और हालात को सामान्य बनाने की अपील की।
क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में मदद कर सकता है।



