China Diplomatic Row: ड्रैगन ने पर्दे के पीछे से चली अपनी चाल, मध्यस्थता के दावों पर मचा सियासी घमासान
China Diplomatic Row: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने तनावपूर्ण रिश्तों को लेकर एक नया विवाद जन्म ले चुका है, जिसने राजधानी दिल्ली की सियासत को गरमा दिया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी के हालिया बयान ने, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने का दावा किया है, एक बड़ा संवैधानिक और राष्ट्रीय सवाल खड़ा कर दिया है। (Geopolitical Tension) के इस दौर में कांग्रेस पार्टी ने सरकार के मौन पर सवाल उठाते हुए इसे देश की संप्रभुता से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस ने दागे तीखे सवाल, चुप्पी पर घेरा
विपक्ष ने चीन के इन दावों को न केवल चिंताजनक बताया है बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जनता इस संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्टीकरण चाहती है। (National Security) जैसे गंभीर विषय पर प्रधानमंत्री की चुप्पी देश के लिए घातक साबित हो सकती है, क्योंकि विदेशी ताकतें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका का बखान कर रही हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का रहस्य
यह विवाद केवल चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अमेरिकी राजनीति से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर याद दिलाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Military Intervention) को रोकने में अपनी व्यक्तिगत भूमिका का दावा करते रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अपने ‘मित्र’ के इन दावों का कभी खंडन नहीं किया, जो भारत के स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाता है।
चीन की दोहरी चाल और सेना का पुराना रुख
कांग्रेस पार्टी का तर्क है कि चीन हमेशा से पाकिस्तान का सामरिक सहयोगी रहा है, ऐसे में उसका मध्यस्थ बनना भारत के हितों के विरुद्ध है। 4 जुलाई 2025 को सेना के उप प्रमुख राहुल सिंह द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए रमेश ने कहा कि भारत (Frontline Combat) में चीन का सामना कर रहा था। ऐसे में चीन द्वारा मध्यस्थता की बात करना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह उन सैनिकों के बलिदान का भी अपमान है जो सीमा पर डटे हुए थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ‘मजाक’ की आशंका
कांग्रेस ने आशंका व्यक्त की है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर देश की जनता से कुछ छिपा रही है। जयराम रमेश के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता (Foreign Policy) के उस बुनियादी सिद्धांत के विपरीत है, जिसमें भारत हमेशा से किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का विरोध करता आया है। अगर चीन के दावों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह हमारी स्वायत्तता पर एक गंभीर प्रहार माना जाएगा।
चीन को ‘क्लीन चिट’ देने का पुराना विवाद
विपक्ष का मानना है कि जून 2020 की घटनाओं के बाद सरकार के लचीले रुख ने भारत की स्थिति को कमजोर किया है। प्रधानमंत्री द्वारा चीन को कथित रूप से दी गई ‘क्लीन चिट’ ने हमारी (Diplomatic Bargaining) शक्ति को कम कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि इसी वजह से आज चीन जैसे देश भारत के आंतरिक और द्विपक्षीय मामलों में अपनी सफलता के झंडे गाड़ने का दावा कर रहे हैं।
आर्थिक निर्भरता और व्यापार घाटे का डर
भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार घाटा भी इस कूटनीतिक विवाद का एक बड़ा केंद्र बिंदु है। जयराम रमेश ने रेखांकित किया कि भारत का अधिकांश निर्यात अब चीन से आने वाले आयात पर टिका हुआ है। इस (Economic Dependency) के माहौल में चीन का शत्रुतापूर्ण रुख और उसके बाद मध्यस्थता का दावा करना भारत को एक मुश्किल स्थिति में डालता है, जिसका जवाब सरकार को देना ही होगा।
वांग यी के दावे ने आग में घी का काम किया
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को अपनी वार्षिक सफलताओं की सूची गिनाते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया था। (Mediation Claims) की इस सूची ने भारतीय विदेश मंत्रालय के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। चीन इसे अपनी सॉफ्ट पावर की जीत के रूप में देख रहा है, जबकि भारत में इसे संप्रभुता में दखलअंदाजी माना जा रहा है।
भारत सरकार की दो-टूक प्रतिक्रिया और स्टैंड
चीन के इन भ्रामक दावों के बीच भारत सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नई दिल्ली का आधिकारिक मत है कि 7 से 10 मई के बीच हुआ संघर्ष केवल सैन्य स्तर की बातचीत से सुलझाया गया था। (Bilateral Dialogue) ही एकमात्र जरिया था जिससे तनाव को कम किया गया, और इसमें किसी तीसरे देश या बाहरी मध्यस्थ की कोई भूमिका नहीं थी। भारत ने फिर दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ मुद्दों को सुलझाने के लिए शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र का पालन किया जाएगा।
भविष्य की कूटनीति और पारदर्शिता की मांग
अंततः, यह पूरा घटनाक्रम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और घरेलू राजनीति के बीच एक जटिल संतुलन की मांग करता है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अचानक रुकने के पीछे के असली कारणों को साझा करना चाहिए। (Transparency in Governance) की मांग करते हुए विपक्ष ने कहा है कि जब तक सरकार आधिकारिक तौर पर इन विदेशी दावों का पुरजोर खंडन नहीं करती, तब तक देश की जनता के मन में संदेह बना रहेगा।