स्वास्थ्य

ZeroFatDiet – क्या इस चीज को डाइट से फैट पूरी तरह हटाना सही फैसला…

ZeroFatDiet – आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने की चाह ने लोगों की खाने की आदतों को काफी बदल दिया है। वजन घटाने और स्लिम दिखने की होड़ में कई लोग अपनी डाइट से वसा यानी फैट को लगभग पूरी तरह बाहर कर रहे हैं। बाजार में भी लो-फैट और जीरो-फैट उत्पादों की भरमार है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई शरीर को बिना फैट के स्वस्थ रखा जा सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पोषक तत्व को पूरी तरह खत्म कर देना संतुलित आहार की अवधारणा के खिलाफ है। शरीर को सही ढंग से काम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फैट—सभी की जरूरत होती है।

फैट क्यों है जरूरी?

डायटिशियन बताते हैं कि शरीर की कई अहम प्रक्रियाएं हेल्दी फैट पर निर्भर करती हैं। विटामिन ए, डी, ई और के जैसे fat-soluble vitamins के अवशोषण के लिए वसा आवश्यक है। यदि आहार में पर्याप्त फैट नहीं होगा तो ये विटामिन शरीर में ठीक से काम नहीं कर पाएंगे।

फैट सिर्फ ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि यह कोशिकाओं के निर्माण, हार्मोन संतुलन और मस्तिष्क के कार्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुड फैट, खासकर omega-3 fatty acids, न्यूरॉन्स के बीच संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

जीरो-फैट ट्रेंड के संभावित नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बेहद कम वसा वाला आहार लेने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन, त्वचा का रूखापन, बालों का झड़ना और लगातार थकान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

महिलाओं में हेल्दी फैट की कमी मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ियों और प्रजनन से जुड़ी दिक्कतों का कारण बन सकती है। वहीं पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर असर पड़ सकता है।

कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि अत्यधिक कम वसा वाला आहार मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। लंबे समय तक पोषक तत्वों की कमी से मूड डिसऑर्डर और संज्ञानात्मक समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

कौन सा फैट चुनें?

यह समझना जरूरी है कि सभी प्रकार के फैट एक जैसे नहीं होते। mono-unsaturated और poly-unsaturated fats को दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। इन्हें देसी घी की सीमित मात्रा, सरसों, नारियल या तिल के तेल, बादाम, अखरोट, अलसी के बीज, एवोकाडो और ऑलिव ऑयल से प्राप्त किया जा सकता है।

इसके विपरीत, trans fat और अत्यधिक saturated fat का सेवन सीमित रखना चाहिए, क्योंकि ये हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं।

संतुलित आहार ही बेहतर विकल्प

पोषण विशेषज्ञों का सुझाव है कि कुल दैनिक कैलोरी का लगभग 20 से 35 प्रतिशत हिस्सा हेल्दी फैट से आना चाहिए। डाइट में दालें, बीन्स, अंडे, दूध, दही, हरी सब्जियां, फल और नट्स शामिल करना फायदेमंद रहता है।

खाना पकाने में सीमित मात्रा में स्वस्थ तेल का उपयोग करें और प्रोसेस्ड व तले हुए खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें।

फिट रहने के लिए फैट को पूरी तरह हटाना जरूरी नहीं, बल्कि सही प्रकार और संतुलित मात्रा में इसका सेवन ही स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी है।

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