स्वास्थ्य

Yoga Routine – शाम के ये आसान योगासन थकान और पेट की परेशानी में दे सकते हैं राहत

Yoga Routine – आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, लगातार स्क्रीन देखना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आम बात हो गई है। इसका असर सिर्फ शरीर की ऊर्जा पर ही नहीं, बल्कि पाचन तंत्र और मानसिक संतुलन पर भी दिखाई देता है। कई लोगों को दिन ढलते-ढलते पेट में भारीपन, गैस, सूजन और शरीर में अकड़न जैसी समस्याएं महसूस होने लगती हैं। ऐसे में हर व्यक्ति कठिन व्यायाम या भारी कसरत करने की स्थिति में नहीं होता, इसलिए हल्के योगाभ्यास एक सहज विकल्प बनकर सामने आते हैं।

शाम के समय योग क्यों माना जाता है उपयोगी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर की भागदौड़ के बाद शरीर और मन को आराम देने के लिए शाम के समय हल्के योगासन किए जा सकते हैं। ये अभ्यास शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय रखते हुए तनाव कम करने और मांसपेशियों को आराम देने में मदद करते हैं। नियमित रूप से कुछ मिनट योग करने से दिनभर जमा हुई थकान कम हो सकती है और शरीर अधिक संतुलित महसूस कर सकता है।

बालासन से मिल सकता है मानसिक और शारीरिक आराम

बालासन को आरामदायक योग मुद्राओं में शामिल किया जाता है। इस आसन के दौरान शरीर आगे की ओर झुकता है, जिससे पीठ, कंधों और कमर को आराम मिलता है। यह अभ्यास मन को शांत करने और तनाव कम करने में भी सहायक माना जाता है। शाम के समय एक-दो मिनट तक इस मुद्रा में रहने से शरीर को विश्राम का अनुभव हो सकता है और मानसिक दबाव कम महसूस हो सकता है।

पवनमुक्तासन पाचन तंत्र को दे सकता है सहारा

पेट से जुड़ी सामान्य परेशानियों के लिए पवनमुक्तासन को लाभकारी योगासन माना जाता है। इसमें घुटनों को मोड़कर पेट की ओर लाया जाता है, जिससे उदर क्षेत्र पर हल्का दबाव बनता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक हो सकती है। साथ ही, यह पाचन क्रिया को सक्रिय रखने में भी मदद कर सकता है।

सुप्त मत्स्येंद्रासन से कम हो सकती है शरीर की जकड़न

लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से रीढ़ और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुप्त मत्स्येंद्रासन एक ऐसा योगासन है जिसमें लेटकर शरीर को हल्के मोड़ की स्थिति में लाया जाता है। यह रीढ़ की लचक बनाए रखने और शरीर के विभिन्न हिस्सों में खिंचाव पैदा करने में मदद करता है। शाम के समय इसका अभ्यास करने से शरीर अधिक हल्का और आरामदायक महसूस कर सकता है।

विपरीत करणी से पैरों को मिल सकता है आराम

विपरीत करणी एक सरल लेकिन प्रभावी योग मुद्रा मानी जाती है। इसमें पैरों को दीवार के सहारे ऊपर रखा जाता है और शरीर को आराम की स्थिति में रखा जाता है। लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह अभ्यास उपयोगी माना जाता है। इससे पैरों की थकान कम करने और रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

कैट-काउ स्ट्रेच से बढ़ सकती है रीढ़ की सक्रियता

कैट-काउ स्ट्रेच, जिसे मार्जरीआसन और बितिलासन के रूप में भी जाना जाता है, रीढ़ को गतिशील बनाए रखने वाला सरल योग अभ्यास है। इस प्रक्रिया में शरीर को क्रमशः ऊपर और नीचे की ओर मोड़ा जाता है, जिससे पीठ और पेट के आसपास हलचल होती है। यह अभ्यास दिनभर की जकड़न कम करने और शरीर को अधिक लचीला महसूस कराने में मदद कर सकता है। शाम के समय इसे करने से आराम और ताजगी का अनुभव मिल सकता है।

अभ्यास से पहले रखें इन बातों का ध्यान

हालांकि ये योगासन सामान्य रूप से हल्के और सरल माने जाते हैं, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य समस्या, पुरानी चोट या लगातार दर्द की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। योग का अभ्यास आरामदायक वातावरण में और अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए। नियमितता और सही तकनीक के साथ किए गए योगासन शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।

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