स्वास्थ्य

Hypertension High Blood Pressure: हाइपरटेंशन और मानसिक तनाव के बीच क्या है संबंध, जानें क्यों…

Hypertension High Blood Pressure: अक्सर जब हम ‘हाइपरटेंशन’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल ‘बहुत ज्यादा मानसिक तनाव’ या टेंशन का आता है। नाम की बनावट के कारण लोग अक्सर इसे केवल दिमागी परेशानी समझ लेते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में इसकी हकीकत कुछ और ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि हाइपरटेंशन कोई मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में रक्त के ऊंचे दबाव की स्थिति है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हाई ब्लड प्रेशर’ कहा जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इसे ‘साइलेंट किलर’ माना जाता है, क्योंकि यह बिना किसी बड़े लक्षण के चुपचाप शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को खोखला करना शुरू कर देता है।

Hypertension High Blood Pressure: हाइपरटेंशन और मानसिक तनाव के बीच क्या है संबंध, जानें क्यों...
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शब्द का अर्थ और विज्ञान: क्यों मिला इसे यह नाम?

हाइपरटेंशन शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है। इसमें ‘हाइपर’ का अर्थ होता है सामान्य से अधिक या अत्यधिक, जबकि ‘टेंशन’ का संदर्भ रक्त वाहिकाओं यानी धमनियों के भीतर पैदा होने वाले दबाव से है। सरल शब्दों में कहें तो, जब धमनियों की दीवारों पर रक्त का प्रवाह बहुत तेज दबाव डालने लगता है, तो उस स्थिति को हाइपरटेंशन कहा जाता है। इस स्थिति में हृदय को पूरे शरीर में रक्त पंप करने के लिए सामान्य से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यदि यह दबाव लंबे समय तक बना रहे, तो धमनियां कमजोर होने लगती हैं और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

क्या है इसके पीछे की मुख्य वजह और जोखिम कारक?

एक सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप औसतन 120/80 mmHg होना चाहिए। जब यह पैमाना लगातार 140/90 mmHg या इससे ऊपर जाने लगता है, तो डॉक्टरी परामर्श अनिवार्य हो जाता है। इसके कारणों पर गौर करें तो आज की आधुनिक जीवनशैली सबसे बड़ी गुनहगार नजर आती है। भोजन में नमक की अत्यधिक मात्रा, बाहर का तला-भुना खाना और पैकेट बंद प्रोसेस्ड फूड का सेवन इसके मुख्य कारक हैं। इसके अलावा, शारीरिक व्यायाम की कमी, मोटापा और धूम्रपान जैसी आदतें आग में घी डालने का काम करती हैं। हालांकि, जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकता भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है; यदि परिवार में माता-पिता को यह समस्या है, तो बच्चों में इसका जोखिम स्वतः बढ़ जाता है।

कैसे पहचानें शरीर में बढ़ते रक्तचाप के लक्षण?

चूंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत मामूली होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन शरीर कुछ सूक्ष्म संकेत जरूर देता है। लगातार सिरदर्द रहना, बिना कारण चक्कर आना या दृष्टि में धुंधलापन आना इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ मरीजों को सीने में भारीपन महसूस होता है या थोड़ी दूर चलने पर ही सांस फूलने लगती है। यदि आपको बार-बार थकान महसूस हो रही है या नाक से खून आने जैसी समस्या हो रही है, तो यह ब्लड प्रेशर के खतरनाक स्तर पर होने का इशारा हो सकता है। इन लक्षणों को केवल सामान्य थकान मानकर छोड़ देना जानलेवा साबित हो सकता है।

नियंत्रण और बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी बदलाव

हाइपरटेंशन को नियंत्रित करना पूरी तरह असंभव नहीं है, बशर्ते आप अपनी आदतों में अनुशासन लाएं। सबसे पहले अपने नमक के सेवन को सीमित करें और पोटैशियम युक्त ताजे फल व सब्जियों को डाइट में शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की तेज सैर या योग न केवल वजन घटाने में मदद करेगा बल्कि धमनियों के लचीलेपन को भी बनाए रखेगा। तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान (Meditation) और पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित अंतराल पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

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