स्वास्थ्य

EBVAlert – एपस्टीन-बार वायरस को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी

EBVAlert – पिछले कुछ वर्षों में संक्रामक बीमारियों ने जिस तेजी से दुनिया को प्रभावित किया है, उसने स्वास्थ्य तंत्र की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। कोविड महामारी के दौर ने यह दिखा दिया कि एक वायरस किस तरह सीमाओं को पार कर वैश्विक संकट खड़ा कर सकता है। इसके बाद भी निपाह, फ्लू के नए स्ट्रेन और अन्य संक्रमणों ने चिंता कम नहीं होने दी। अब वैज्ञानिकों ने एक और ऐसे वायरस को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है, जो भले ही नया नहीं है, लेकिन इसके प्रभावों को लेकर अध्ययन लगातार गंभीर संकेत दे रहे हैं। यह वायरस है एपस्टीन-बार वायरस, जिसे संक्षेप में ईबीवी कहा जाता है।

जूनोटिक बीमारियों से बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बीते वर्षों में जिन बड़ी बीमारियों का प्रकोप देखा गया, उनमें से कई का संबंध जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संक्रमणों से रहा है। वनों की कटाई और तेज शहरीकरण के कारण इंसानों और जंगली जीवों के बीच दूरी घटती जा रही है। ऐसे में संक्रमण के नए रास्ते खुल रहे हैं। हालांकि एपस्टीन-बार वायरस सीधे तौर पर हालिया महामारी जैसा आक्रामक नहीं है, फिर भी इसके व्यापक प्रसार और संभावित दुष्प्रभावों ने शोधकर्ताओं को सतर्क किया है।

एपस्टीन-बार वायरस क्या है

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एपस्टीन-बार वायरस दुनिया में सबसे आम मानव वायरस में से एक है। इसे ह्यूमन हर्पीसवायरस-4 भी कहा जाता है और यह हर्पीस वायरस परिवार का हिस्सा है। इसकी पहचान 1964 में की गई थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि विश्व की 95 प्रतिशत से अधिक वयस्क आबादी जीवन में कभी न कभी इस संक्रमण से गुजर चुकी है। अधिकांश मामलों में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि संक्रमित व्यक्ति को पता तक नहीं चलता।

कैसे फैलता है संक्रमण

यह वायरस मुख्य रूप से लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन या पेय साझा करने, एक ही बर्तन या गिलास का उपयोग करने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। चुंबन के जरिए इसके फैलने की संभावना अधिक होती है, इसी कारण इसे अनौपचारिक रूप से किसिंग डिजीज भी कहा जाता है। चूंकि कई संक्रमित लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, वे अनजाने में दूसरों तक वायरस पहुंचा सकते हैं।

संभावित लक्षण और जटिलताएं

अधिकांश लोगों में यह संक्रमण हल्का रहता है, लेकिन कुछ मामलों में थकान, बुखार, गले में सूजन, त्वचा पर चकत्ते या प्लीहा और यकृत में सूजन देखी जा सकती है। सामान्यतः दो से चार सप्ताह में लक्षण कम हो जाते हैं, हालांकि कुछ व्यक्तियों को लंबे समय तक थकान रह सकती है। शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि यह वायरस कुछ प्रकार के कैंसर और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इन संबंधों पर अभी और अध्ययन जारी हैं।

शरीर में बना रहता है वायरस

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार संक्रमण होने के बाद वायरस शरीर में निष्क्रिय अवस्था में बना रह सकता है। अत्यधिक तनाव, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या हार्मोनल बदलाव जैसी परिस्थितियां इसे दोबारा सक्रिय कर सकती हैं। इसी कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित जीवनशैली और मजबूत इम्युनिटी बनाए रखने की सलाह देते हैं।

बचाव के उपाय

इस संक्रमण का कोई विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन या पेय साझा न करना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और व्यक्तिगत वस्तुओं को साझा करने से बचना जरूरी है। यदि किसी को लंबे समय तक बुखार, असामान्य थकान या अन्य लक्षण महसूस हों तो चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञ इस वायरस पर आगे भी शोध जारी रखे हुए हैं ताकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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