DehydrationRisk – गर्मियों में पानी की कमी से बढ़ सकते गंभीर स्वास्थ्य खतरे
DehydrationRisk – देश के कई हिस्सों में गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है और इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा भी बढ़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में शरीर को खास देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि तेज धूप, लू और खानपान में लापरवाही कई तरह की समस्याओं को जन्म दे सकती है। इन दिनों सबसे आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है शरीर में पानी की कमी, जिसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है।

डिहाइड्रेशन को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
अक्सर लोग प्यास लगने को ही पानी पीने का संकेत मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार जब तक प्यास महसूस होती है, तब तक शरीर में पानी की कमी शुरू हो चुकी होती है। डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षणों में थकान, सिरदर्द, चक्कर आना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी शामिल हैं। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए।
शरीर के कामकाज पर पड़ता है सीधा असर
मानव शरीर का एक बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है और यही पानी शरीर के कई जरूरी कार्यों को सुचारू बनाए रखता है। यह रक्त संचार, शरीर का तापमान संतुलित रखने और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। गर्मी के मौसम में अधिक पसीना, उल्टी-दस्त या बुखार जैसी स्थितियों के कारण शरीर में तरल पदार्थ तेजी से कम हो सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
मानसिक और शारीरिक क्षमता दोनों होती हैं प्रभावित
जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो इसका असर केवल शारीरिक ऊर्जा तक सीमित नहीं रहता। दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त न पहुंच पाने के कारण मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। व्यक्ति को भ्रम, चिड़चिड़ापन और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति बेहोशी तक पहुंच सकती है।
किडनी पर बढ़ता है दबाव
डिहाइड्रेशन का असर किडनी पर भी पड़ता है। किडनी का मुख्य काम शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है, लेकिन जब पानी की कमी होती है तो यह प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे पथरी, यूरिन संक्रमण और गंभीर मामलों में किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए शरीर में पर्याप्त पानी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
लंबे समय में गंभीर बीमारियों का जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक लगातार पानी की कमी बने रहने से शरीर के अंदरूनी अंगों पर दबाव पड़ता है। कुछ शोध यह भी संकेत देते हैं कि यह स्थिति पैंक्रियाज के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है और पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो इससे गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में नियमित अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए, भले ही प्यास न लगे। अपने साथ हमेशा पानी की बोतल रखना एक अच्छी आदत हो सकती है। मीठे पेय पदार्थों की बजाय सादा पानी या बिना चीनी वाले पेय अधिक फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा, धूप में निकलते समय सावधानी बरतना और संतुलित आहार लेना भी जरूरी है।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
गर्मी के मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि शरीर के संकेतों को समझा जाए और समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं। पर्याप्त पानी पीना एक साधारण आदत है, लेकिन इसका असर पूरे स्वास्थ्य पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।



